फजीहत: भाग-IV—एक बार फिर शर्मसार हुई भारतीय रेल—क्या अब भी सोने का नाटक करेगा रेल मंत्रालय?

#Ep195: सिस्टम की फजीहत: मध्य रेल के एक और #HOD पर #CBI की कार्रवाई!

February 15, 2023, को हमने लिखा था: KMG_2.0: A cynic’s view – रेलवे के धनकुबेरों का सिंडीकेट! इसमें एक वरिष्ठ सेवानिवृत्त रेल अधिकारी से चर्चा कर हमने कहा था: “प्रधानमंत्री जी, अगर रेलवे की सेहत ठीक करनी है, तो आपकी एजेंसियों को इस “पंचारिष्ट” पर काम करना ही चाहिए!”

A railway officer remarked that #IndianRailways is desperately in need of #reform and refuses to accept the dichotomy based on ESE vs CSE paradigm. He summarises the web of railways organised services as under:

  • Those who take money from contractors are engineering services,
  • Those who take money from their customers is traffic service,
  • Those who take money from own employees is personnel service,
  • Those who are omnivores constitute Accounts, RPF and Medical services.

A cynical railway officer mentioned that Indian Railways (IR) desperately requires reform and should abandon the dichotomy between Engineering Services (#ESE) and Civil Services (#CSE) in career progression.

समस्या सीधी नहीं थी, जैसा बताया गया राजनैतिक नेतृत्व को। वैसे भी बार-बार यू-टर्न ले-लेकर भी स्थिति यथावत तो नहीं हुई, लेकिन और रसातल में चली गई है। खैर, रेल का नेतृत्व खान मार्केट गैंग (#KMG) और ऑल इंडिया डेल्ही सर्विस (#AIDS) की पकड़ से मुक्त होने से इनकार करता रहा और हमारे फीडबैक पर आधा-अधूरा काम होता रहा। एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि शायद राजनैतिक नेतृत्व “स्टॉकहोम सिंड्रोम” से ग्रसित है, इसीलिए वह असली दमनकारी, भ्रष्ट, जुगाड़तंत्र के मकड़जाल—जिसे हमने #AIDS और #KMG की संज्ञा दी है—से सहानुभूति रखता है। यह सिस्टम की एक बड़ी मनोवैज्ञानिक परेशानी है।

खैर, उपरोक्त लेख में प्रधानमंत्री जी को हमने निम्न सुझाव दिए थे:

How to identify the monied powerful officials of railways—the #Pancharisht-

  1. Have spent 80-90% time working only on important positions.
  2. Have exceeded 3-4-5 year limit of posting of #CVC for working in #sensitive posts, exceeding this limit by change of designation but working with similar contractors, handling similar jobs.
  3. Living in the same city for more than 10 years by switching of designations. (#JAG, #SAG, #HAG are the stages when one must without exception be moved to different cities or divisions and zones).
  4. If both husband-wife are working, both should undergo change the place of posting. Spouse ground has led to officers being posted in one city for very long periods of time. This trend must be stopped. Posting in a city twice in one’s career on spouse ground.
  5. Screen Provident Funds (#PFs) of officers, screen investments of family declared on pass rules. This is usually clear give away of ‘other’ income sources.
  6. Officers who occupy highest positions in Zonal Railways, Railway Board, Minister’s office, who handle transfer, posting, empanelments—{and those who have spent 80-90% of career on important positions handling tenders, transfers, postings, examinations and then occupying important positions in Railway Board}.

Sir, above can be done on existing databases of government. This can be first tier of 360 degree review which would be most objective. Exceptions will always be there, but then they would be few. It would also help top level to monitor what is happening under their noses. The same can be seen by external monitors. You can consider having a retired senior bureaucrat as #ombudsman in the process.

हमने कई बार सरकार को चेताया:

जुलाई 12, 2023: The Trillion Rupee Blunder – Modiji Beware!

मार्च 21, 2024: Ten Years-An Assessment: Failure to Act on #KMG is Ticking Time Bomb for the Minister

अप्रैल 16, 2025: Politicisation of Technical Work-Minister Sir What is Your Take?

मई 16, 2025: Politicisation of Technical Work-Minister Sir What is Your Take? Part-II

नवंबर, 23, 2023: फजीहत !

अप्रैल, 19, 2025: फजीहत : Part-II

मई 05, 2025: फजीहत : भाग-III

मई 01, 2023: रेल में व्याप्त भ्रष्टाचार: विजिलेंस प्रकोष्ठ की जवाबदेही?

शाही फजीहत

#CBI ने मध्य रेल के मुख्य विद्युत वितरण अभियंता (#CEDE) को दस लाख रुपये की रिश्वत के साथ गिरफ्तार किया, चैंबर की तलाशी में ही करीब चार लाख रुपये नकद और मिले! पता नहीं किस गरीब को इन्होंने छीला होगा! साहब ने मुंबई में ही बतौर जूनियर इंजीनियर (#JE) नौकरी चालू की। सेवाभाव और आपूर्ति इतनी अच्छी रही कि सभी वरिष्ठ अधिकारियों के चहेते बन गए और मुंबई में ही ग्रुप ‘C’ से ग्रुप ‘A’ (SAG) तक की लंबी यात्रा तय की।

इनके एक ही जगह टिके रहने से जो नेटवर्क बना उससे सेवा एवं आपूर्ति की गुणवत्ता और निखरती रही, और खेल लगातार चलता रहा। पूरा रेल तंत्र—जो मुंबई में बैठा है—इस सेवा की अफीम में मस्त रहा और अंत में CBI को वह करना पड़ा जो प्रशासनिक शुचिता से कब का हो जाना चाहिए था। यह खेल खुलेआम चला कि पोस्ट बदलकर CVC की गाइडलाइन का पालन किया जाए, लेकिन स्थान विशेष में रहने से बढ़ते और मजबूत होते नेक्सस का क्या? एक अधिकारी ने खुलकर कहा कि, “ये तो सुई की नोक बराबर भी नहीं-जो कांड S&T में, ट्रैफिक लोडिंग में, PU के स्टोर्स में, मैकेनिकल में, GSU में, RVNL, RLDA जैसे संगठनों में चल रहे हैं, वह तो पाकिस्तान जैसे भिखारी देश की अर्थव्यवस्था ही सुधार दें!”

रेल मंत्रालय ने यह तो अच्छा किया कि रेल भवन के विजिलेंस प्रकोष्ठ को बदलकर, उगाही बंद करवा दी, लेकिन क्या ऐसे अधिकारी और मिलेंगे जब ये अधिकारी प्रमोट हो बाहर चले जाएँगे?

प्रोडक्शन यूनिट्स (#PU) में और ज़ोनल हेड क्वार्टर्स में काम कर रहे विजिलेंस विभाग के खुले हिसाब हैं। साहब लोग सेवा और विलासिता की अभिलाषा में #SDGM बनते हैं और खूब सेवा करवाते हैं, और प्रवचन भी खूब देते हैं। रीढ़ में एक भी हड्डी नहीं जो किसी ईमानदार कर्मचारी के साथ खड़े हो सकें। याद रहे, बोर्ड विजिलेंस की “त्रिमूर्ति” ने भी कई सेमिनार में प्रवचन दिए थे। जितना अभी पकड़ा गया है उतने से तो त्रिमूर्ति की दाढ़ गीली भी नहीं होती थी।

CEDE साहब और दो अन्य लोग CBI ने पकड़े, पता चला कि चालीस करोड़ के ठेके पर एक परसेंट, यानि चालीस लाख की मांग थी और ये दस लाख पहली किश्त थी। खैर, जैसा कई जगह से फीडबैक आया, इससे अधिक तो रेल के सुपरवाइजर कमा लेते हैं, आगे जांच में और क्या मिलता है, उससे इनकी विशिष्टता सिद्ध होगी।

हमाम में नंगे PHOD

हमने मध्य रेल के एक विजिलेंस अधिकारी के बारे में तत्कालीन महाप्रबंधक को फीडबैक दिया था, इस अधिकारी के समर्थन में आज के लुकिंग ऑफ्टर महाप्रबंधक और आज के SDGM परचम लिए खड़े थे। ये तो उन जीएम साहब की कार्यशैली थी कि उन्हें ‘सेवा’ की अभिलाषा नहीं थी, उन्होंने प्रशासनिक शुचिता दिखाते हुए एक्सटेंशन नहीं दिया। लेकिन यदि इन CEDE साहब के मामले में अगर पिछले कई दशकों से एक भी अधिकारी इन्हें स्थान परिवर्तन के लिए निर्णय लेता तो ये ‘शाही फजीहत’ नहीं हुई होती! क्यों एक JE उसी शहर में, उसी रेल में HOD बने? क्या जस्टिफिकेशन है इसका?

इसी रेल में हमने ट्रैफिक डिपार्टमेंट के भी कांड को प्रकाशित किया था: अप्रैल 24, 2025: भारतीय रेल : जड़ में लगी दीमक! इसके अलावा, इसी तरह कमर्शियल का भी एक अधिकारी ग्रुप ‘सी’ में नौकरी जॉइन करने से लेकर जेएजी पहुंचने तक मुंबई में ही है और बकायदे बीवी के नाम से टीसियों को माध्यम बनाकर साजोसामान का अपना धंधा चला रहा है। ऐसे ही अन्य तमाम लोग सुपरवाइजरों से लेकर एचओडी/पीएचओडी, एसडीजीएम, एजीएम/जीएम तक इस वर्ग में शामिल हैं।

कैसे मध्य रेल के एक PHOD—जो अब रेलवे बोर्ड में PED बन बैठे हैं—अपने इंस्पेक्टर को उसी शहर में दसियों साल रखने के लिए आतुर थे। एक मामले में तो कार्यवाही हुई—पुणे में न रखकर बगलबच्चा बनाकर अपने पास मुंबई में लाना पड़ा—लेकिन अन्य मंडल में नहीं भेजा कि कहीं धूप में वह कुम्हला न जाए, उसकी त्वचा काली न पड़ जाए—यह भी तब हुआ जब तत्कालीन महाप्रबंधक ने स्टैंड लिया।

यहीं मुंबई में कुछ इंस्पेक्टर आज भी JAG और सिलेक्शन ग्रेड में हैं—वह भी कमर्शियल जैसे संवेदनशील डिपार्टमेंट में—कुछ तो अपने व्यवसाय भी खुले रूप से चला रहे हैं। मध्य रेल के वर्तमान प्रिंसिपल चीफ ऑपरेशंस मैनेजर (#PCOM)—दक्षिण मध्य रेलवे में वरिष्ठ उपमहाप्रबंधक (#SDGM) भी रहे हैं—उन्हें यह देखना होगा कि ऐसे सभी अधिकारियों को रोटेट किया जाए। यह लुकिंग ऑफ्टर GM और SDGM को भी तत्काल प्रभाव से देखना होगा।

यहाँ कुछ पूर्व आर्टिकल पुनः सभी संबंधित अथॉरिटीज के संज्ञान में लाए जा रहे हैं-

CBI Arrests CEDE, Central Railway in a Bribery Case

A CBI Trap in Central Railway—GM & SDGM in Dock

All the PHODs should ensure that their promoted supervisors should see rotation

PFA/ECR की सप्लाई चेन पर GM/ECR की सर्जिकल स्ट्राइक

पक्की खबर: कांट्रेक्टर की शिकायत पर कार्रवाई न कर सीनियर डीईई को बचा रहा था ईसीआर विजिलेंस!

रेलवे में कॉन्ट्रेक्ट डीलिंग पदों पर निर्धारित ट्रांसफर पॉलिसी का उल्लंघन

नॉर्दर्न रेलवे लेखा विभाग में आए दिन सीबीआई केस होने के मुख्य कारण—जूनियर स्केल ऑफिसर्स की पोस्टिंग

CBI Books Cases Against Contractor and Railway Official

#Ep189: NRCH में CBI की रेड—ये तो एक दिन होना ही था

मोदी जी ने बड़े काम किए, लेकिन रेल के बाबू उनकी पकड़ में नहीं आए!

ECR—Nero Fiddled While #Rome Burned