PFA/ECR की सप्लाई चेन पर GM/ECR की सर्जिकल स्ट्राइक
#Railwhispers की फीडबैक का असर: #CBI_FIR में लेखा विभाग, महेंद्रूघाट, पटना का भ्रष्टाचार उजागर होने के बाद कड़ी कार्रवाई करने के बजाय पूर्व मध्य रेलवे (#ECR) के #भ्रष्ट और #जातिवादी प्रिंसिपल फाइनेंस एडवाइजर (#PFA) द्वारा आनाकानी करने पर GM/ECR ने कमान अपने हाथों में ली।
#GMECR के इस सख्त कदम से सालों से महेंद्रूघाट, पटना सहित विभिन्न जगहों पर जमे दर्जनों बाबूओं (SSO(A) AA, JAA, AC, OAA) के सामूहिक स्थानातंरण का ऐतिहासिक फैसला हुआ और इसके परिणामस्वरूप दो साल से अधिक कार्यकाल वाले लगभग 110 बाबुओं को तत्काल स्थानांतरित करने के आदेश जारी किए गए।
ये सामूहिक विभागीय स्थानांतरण और जीएम/ईसीआर का यह साहसिक कदम भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई में एक मील का पत्थर साबित होगा, क्योंकि प्राप्त जानकारी के अनुसार उन्होंने अन्य सभी विभागों को भी स्थानांतरण की इस “नो-नॉनसेंस” नीति पर सख्ती से अमल करके सभी विभाग प्रमुखों को उन्हें रिपोर्ट करने का आदेश दिया है।
भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि #Railwhispers द्वारा बार-बार चेताने के बाद भी पीएफए द्वारा कोई कार्रवाई नहीं किए जाने से जीएम ने सख्त नाराजगी जताई थी। तत्पश्चात पीएफए केवल बारह बाबुओं को हटाने का प्रस्ताव लेकर जीएम के पास पहुंचे थे, परंतु जीएम ने उन्हें स्पष्ट कर दिया कि इतने से काम नहीं चलेगा, या तो वह स्वयं दो साल या उससे अधिक समय से एक जगह टिके सभी बाबुओं को तत्काल हटाएं, या फिर यह काम वह (जीएम) स्वयं करेंगे। तब जाकर यह एक सौ दस बाबुओं को तत्काल प्रभाव से हटाने का आदेश पीएफए को जारी करना पड़ा है।
#GMECR का यह साहसिक कदम अत्यंत सराहनीय है, तथापि उन्हें अपने कुटिल PFA से सावधान रहने की सलाह दी जाती है। कई वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि ECR का पुराना शातिर होने के कारण और अपने सप्लाई नेटवर्क के ध्वस्त होते ही तिकड़मबाजी और कोर्ट-कचहरी के माध्यम से पीएफए द्वारा जीएम के इस महत्वपूर्ण निर्णय को प्रभावित करने की पूरी कोशिश की जा सकती है।
अधिकारियों का यह भी कहना है कि इस तरह के भ्रष्टाचारियों को रेल सेवा से तुरंत हटाया जाना चाहिए। उम्मीद है कि अन्य सभी जोनल रेलों के जीएम भी कुछ इसी तरह का सुधारात्मक कदम उठाएँगे, क्योंकि उनके पीएफए और अन्य विभाग प्रमुखों से यह नहीं हो पाएगा!

