मंत्री जी, रेल को भ्रष्टाचार और छीछालेदर से बचाना है, तो कड़ाई से लागू करें रोटेशन पॉलिसी!
रेलवे जोनों को पूर्ववत करने अथवा रेलवे का पुनर्गठन-पुनर्नियोजन करने पर विचार किया जाना चाहिए!
भारतीय रेल में रोटेशन नीति के उल्लंघन और उच्च अधिकारियों की मनमानी को #Railwhispers ने लगातार उजागर किया है। हाल ही में #DyFA&CAO/#USBRL तथा उत्तर पश्चिम रेलवे (#NWR) के कंस्ट्रक्शन ऑर्गेनाइजेशन में वर्षों से जमे अधिकारियों का मुद्दा भी उजागर किया था।
इसी प्रकार पूर्व मध्य रेलवे (#ECR) में लेखा विभाग में पोस्टिंग से संबंधित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मुद्दों को भी सामने लाकर महत्वपूर्ण कार्य किया है। इसी संदर्भ में पूर्वोत्तर रेलवे के एक कर्मचारी द्वारा कुछ महत्वपूर्ण तथ्य #रेलव्हिस्पर्स के संज्ञान में लाए गए हैं।
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यह समस्या केवल कुछेक जोन तक सीमित नहीं है। पूर्वोत्तर रेलवे (#NER) के लेखा विभाग में भी #रोटेशन_नीति की भावना का लगातार उल्लंघन देखने को मिल रहा है।
वाराणसी मंडल में वर्तमान #SrDFM, अप्रैल-2021 में #DFM के रूप में आए और बाद में वहीं SrDFM के रूप में पदोन्नत हो गए। इस प्रकार वे पाँच वर्षों से अधिक समय से एक ही स्थान पर कार्यरत हैं। लंबे समय तक एक ही स्थान पर रहने से ठेकेदारों और अधिकारियों के बीच स्थायी संपर्क बन जाना स्वाभाविक है।
इसी अवधि में इंजीनियरिंग विभाग के कुछ अधिकारियों को #CBI द्वारा रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया, और एक मामले में लेखा विभाग के एक्सपेंडिचर स्टाफ का नाम भी चार्जशीट में आया था।
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इसके अतिरिक्त मैकेनिकल वर्कशॉप गोरखपुर में #SrAFA भी लंबे समय से तैनात हैं। पहले लगभग चार वर्ष वहीं रहे, लेकिन पहले कार्यकाल के दौरान #NPS से संबंधित अनियमितताओं के आरोपों के चलते उन्हें वहाँ से हटाया गया था। बाद में उन्हें कुछ समय के लिए मुख्यालय भेजा गया, किंतु लगभग एक वर्ष के भीतर ही पुनः उसी वर्कशॉप में पोस्टिंग कर दी गई।
वर्तमान कार्यकाल में भी हत्या के आरोपी एक कर्मचारी के सेटलमेंट को कथित रूप से नियम विरुद्ध तरीके से निपटान करने के मामले में विजिलेंस द्वारा जांच किए जाने की बात भी चर्चा में है।
रेलवे बोर्ड की स्पष्ट नीति है कि #संवेदनशील पदों पर लंबे समय तक एक ही अधिकारी की तैनाती नहीं होनी चाहिए। सामान्यतः आवधिक स्थानांतरण नीति के तहत एक स्थान पर कर्मचारी का अधिकतम कार्यकाल चार वर्ष और अधिकारी का कार्यकाल तीन वर्ष निर्धारित है।
इसके अतिरिक्त नवीनतम नीति के अनुसार किसी लेखा अधिकारी को लगातार एक ही मंडल में दुबारा नहीं भेजा जाना चाहिए। इसी प्रकार वर्कशॉप, कंस्ट्रक्शन ऑर्गनाइजेशन और उत्पादन इकाई में बार-बार या रिपीट पोस्टिंग नहीं की जानी चाहिए; ऐसे कार्यकाल के बाद मुख्यालय में अनिवार्य पोस्टिंग अपेक्षित होती है। इसके बावजूद इन मामलों में वर्षों से प्रभावी रोटेशन दिखाई नहीं देता।
NER छोटा जोन होने के कारण अक्सर राष्ट्रीय स्तर पर कम चर्चा में आता है, लेकिन वास्तविकता यह है कि यहाँ भी वही पैटर्न दिखाई देता है—कुछ चुनिंदा अधिकारी वर्षों तक एक ही प्रभावशाली पदों पर बने रहते हैं। यही हाल #SECR, #NWR, #ECoR, #SWR, #ECR और #WCR जैसी छोटी जोनल रेलों का भी है।
मध्य रेलवे में एक वरिष्ठ प्रशासनिक वेतनमान (एसएजी) स्तर के अधिकारी को बड़ी रिश्वतखोरी में रंगेहाथ पकड़े जाने का मामला अभी एकदम ताजा है। इस अधिकारी का भी रोटेशन जेई से लेकर एसएजी तक मुंबई से बाहर एक बार भी नहीं हुआ, जिसका परिणाम सामने है।
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यदि लंबे समय से एक ही जगह एक ही शहर और एक ही रेलवे में जमे हुए अधिकारियों, सुपरवाइजरों, इंस्पेक्टरों के ऐसे मामलों की स्वतंत्र रूप से जाँच-पड़ताल की जाए और तथ्यों को सही पाया जाए, तो इन पर रेलवे बोर्ड और रेलमंत्री को तुरंत संज्ञान लेना चाहिए। इससे रोटेशन नीति के वास्तविक क्रियान्वयन और सिस्टम में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सकती है।

