PLW पटियाला में प्रशासनिक अराजकता और नियमों की धज्जियां: दुराचार करने वाले जूनियर कर्मचारियों को ‘बैकडेट’ से प्रमोट करने की गंभीर साजिश
विश्वस्त सूत्रों से अत्यंत चौंकाने वाली और रेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े करने वाली जानकारी प्राप्त हो रही है। पटियाला लोकोमोटिव वर्क्स (#PLW), पटियाला में एक ईमानदार महिला अधिकारी, पूर्व #PCPO प्रीति कटियार के खिलाफ सोची-समझी साजिश के तहत अशोभनीय और अमर्यादित कृत्य किए गए थे।
साझा की गई तस्वीर में यह स्पष्ट देखा जा सकता है कि किस प्रकार पीएलडब्ल्यू के सार्वजनिक पुरुष शौचालय में महिला अधिकारी के खिलाफ अभद्र और अपमानजनक पोस्टर लगाए गए थे, जो सेवा नियमों और किसी भी सभ्य कार्यस्थल की गरिमा का खुला उल्लंघन है। इतना ही नहीं, राजनीतिक दबाव बनाकर 22 अगस्त 2025 को पीएलडब्ल्यू पटियाला में उनका उग्र घेराव भी किया गया था। यह हंगामा और दबाव तब तक जारी रहा, जब तक कि चेयरमैन/रेलवे बोर्ड (#CRB) ने इस महिला अधिकारी का तबादला पटियाला से कोलकाता नहीं कर दिया।

इस पूरे प्रकरण में सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के बजाय, वर्तमान प्रशासन उन्हीं उपद्रवी तत्वों को उपकृत करने की तैयारी में है। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्तमान सीआरबी और पीएलडब्ल्यू पटियाला के #PCPO परिणय गुप्ता, इस हंगामे के मुख्य कर्ताधर्ताओं—जिनमें विशेष रूप से भवानी सिंह मीणा और महावीर मीणा शामिल रहे हैं—को राजपत्रित पद, असिस्टेंट वर्क्स मैनेजर (AWM) पर पदस्थापित करने का पुरजोर प्रयास कर रहे हैं। इस गैर-संवैधानिक कृत्य को अंजाम देने के लिए नियमावली को ताक पर रखकर इन्हें ‘बैकडेट’ (पिछली तिथि) से पदोन्नति देने की साजिश रची जा रही है।
इस मामले की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो ये दोनों कर्मचारी वर्ष 2024 में आयोजित की गई राजपत्रित चयन प्रक्रिया में पूरी तरह असफल रहे थे। वास्तविकता यह है कि इन कर्मचारियों के पास इस लिखित परीक्षा में बैठने की न्यूनतम पात्रता तक नहीं थी। इन्होंने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (#CAT) की शरण ली थी, जिसके आदेश पर इन्हें केवल अनंतिम (Provisionally) रूप से परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई थी। चयन प्रक्रिया में अनुत्तीर्ण होने के बाद से ही ये कर्मचारी तत्कालीन PCPO प्रीति कटियार से असंतुष्ट थे और उनके खिलाफ व्यक्तिगत एजेंडा चला रहे थे। प्रशासनिक मानदंडों के अनुसार आज भी इन कर्मचारियों के पास इस पद के लिए कोई वैध पात्रता नहीं है, और इनसे वरिष्ठ (Senior) पात्र कर्मचारियों को प्रशासन द्वारा पहले ही आरक्षित वर्ग की रिक्ति पर #AWM बनाया जा चुका है।
सूत्रों का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर राजनीतिक दबाव इस कदर हावी हो चुका है कि नियम-विरुद्ध आचरण करने वाले इन जूनियर कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई करने के बजाय, प्रशासन गैर-संवैधानिक तरीके से इन्हें अनारक्षित (General) पदों पर पिछले दरवाजे से समायोजित करने में जुटा हुआ है। सूत्रों का दावा है कि इसके पीछे एक सुनियोजित ‘डील’ हुई है। हालांकि भवानी सिंह मीणा और महावीर मीणा ने CAT से अपना केस (OA 132/2024) अभी तक वापस नहीं लिया है, लेकिन अंदरूनी समझौता यह हुआ है कि कोर्ट केस वापस लेते ही प्रशासन इन दोनों अनुत्तीर्ण कर्मचारियों को सामान्य वर्ग के एक अधिकारी, AWM विजयपाल के ऊपर वरिष्ठता क्रम (Seniority) में बैठा देगा।
यह संपूर्ण अनैतिक और नियम-विरुद्ध कृत्य अत्यंत गोपनीय तरीके से वर्तमान PCPO (पटियाला) परिणय गुप्ता की देखरेख में संचालित हो रहा है, जो इस संबंध में सीधे रेलवे बोर्ड के शीर्ष नेतृत्व से निर्देश प्राप्त कर रहे हैं। प्रशासनिक नियमों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है, क्योंकि 31 मई 2024 को घोषित हो चुके पैनल की वैध अवधि (Currency) भी अब समाप्त हो चुकी है। ऐसा प्रतीत होता है कि जब उच्च स्तर से सीधे अनुचित आदेश आ रहे हों, तो पीएलडब्ल्यू प्रशासन के लिए स्थापित नियमों और प्रक्रियाओं का कोई महत्व नहीं रह जाता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने पीएलडब्ल्यू और रेलवे बोर्ड के सतर्कता विभाग की घोर निष्क्रियता और मौन सहमति को उजागर कर दिया है। यह कृत्य भारतीय संविधान के अनुच्छेद 16(4A) के प्रावधानों और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा समय-समय पर जारी किए गए दिशा-निर्देशों का खुला उल्लंघन है। AWM कैडर में पहले से ही आरक्षित वर्ग के अधिकारियों की संख्या पर्याप्त और नियमानुसार है, इसके बावजूद PCPO परिणय गुप्ता द्वारा इन दोनों अयोग्य कर्मचारियों को अनुचित लाभ पहुंचाने की जिद कई गंभीर संदेह पैदा करती है। इस पूरे मामले में उच्च स्तरीय मिलीभगत और बड़े पैमाने पर वित्तीय लेन-देन की प्रबल आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इस गंभीर प्रशासनिक कदाचार पर शीर्ष स्तर से तत्काल संज्ञान लेने और निष्पक्ष जांच कराने की आवश्यकता है।
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