KMG_2.0: Crisis of Competence!

कौन हैं वे लोग, जिन्होंने व्यवस्था को तहस-नहस कर दिया है? रेल का ये कैसा नेतृत्व है कि जिसने निर्णय लेने की क्षमता ही खत्म कर दी, वो कौन हैं, कैसे दिखते हैं, जिन्होंने रेलकर्मियों को ऐसी स्थिति में ला दिया है कि आज उनसे रेल व्यवस्था नहीं चल पा रही, न ही उन्हें समझ आ रहा है कि ट्रेन में ब्रेक कैसे लगाए जाएं, बेडरोल कैसे धोया जाए, विद्युतीकरण प्लेटफार्म पर खड़े लोगों की हत्या न करे, FOB का अनुरक्षण कैसे करें? इनकी पहचान कब सुनिश्चित की जाएगी?!?

शुक्रवार, 13 जनवरी, 2023 को माननीय प्रधानमंत्री ने देश में परिवहन की एक बहुत बड़ी पहल का उद्घाटन किया, जिसमें कई राज्यों के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ मंत्री भी मौजूद थे। वाराणसी में इनलैंड वाटरवेज की अभिनव शुरुआत वास्तव में एक बहुत बड़ी पहल है। निश्चित रूप से यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के गति शक्ति विजन का एक महत्वपूर्ण भाग है।

इसी एकीकृत सोच के चलते पिछले 8 सालों में रेल में जितना निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण हुआ है, वह अभूतपूर्व है। आईसीएफ से एलएचबी में शिफ्ट, कोचों और रेल इंजनों का रिकॉर्ड निर्माण, वंदे भारत ट्रेन सेट का आना, दोहरीकरण, नई रेल लाइनों का निर्माण, शत-प्रतिशत विद्युतीकरण, नई डिजाइन के डीजल और विद्युत इंजनों का निर्माण, वैगनों का रिकॉर्ड क्रय ऑर्डर इत्यादि।

लिस्ट बहुत लंबी है।

किसी भी सरकार का रेल के प्रति इतना बड़ा कमिटमेंट अब तक नहीं देखा गया था। इसमें मेट्रो, आरआरटीएस और पोर्ट कनेक्टिविटी आदि जैसे अन्य बड़े इंफ्रास्ट्रक्चरल प्रोजेक्ट्स तो अभी हमने गिने भी नहीं हैं।

हमने एक विस्तृत सीरीज द्वारा सरकार को चेताया कि कैसे भीतरघात से रेल मंत्रालय में ‘मंत्री’ बदलते रहे, लेकिन ‘संत्री’ वहीं डटे रहे – इस अंदर के कोढ़ को माननीय मोदीजी ने ‘खान मार्केट गैंग’ कहा था।

व्यस्वस्था के भीतर छिपे हुए सफेदपोशों को उन्होंने 2019 में ‘खान मार्केट गैंग’ कहकर चिन्हित किया था। पुनः उक्त खबर के लिंक का अवलोकन करें-

https://indianexpress.com/elections/pm-narendra-modi-interview-to-indian-express-live-lok-sabha-elections-2019-bjp-5723186/

उपरोक्त खबर का उल्लेख हमने 4 दिसंबर को प्रकाशित- हरिकेश की मर्माहत मृत्यु – और क्या-क्या दिखाएगा ये खान मार्केट गैंग? पार्ट-1 शीर्षक खबर में भी किया था।

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दिसंबर में जब हमें ज्ञात हुआ कि रेल के सर्वोच्च अधिकारी बदल रहे हैं, हमने सुधी पाठकों से साझा किया कि हम रेल के नए नेतृत्व को अपने पद पर आने और व्यवस्थित (सेटल) होने का समय देना चाहते हैं। #Railwhispers सनसनी की पत्रकारिता में विश्वास नहीं रखता और यह भी समझता है कि इतने विशाल नेटवर्क में फीडबैक वरिष्ठ नेतृत्व तक पहुंचने में समय लगता है।

इसीलिए हमने सभी बड़ी जानकारियों को साक्ष्यों के साथ प्रकाशित करने से पहले उच्च अधिकारियों से साझा करने में विश्वास किया है। लेकिन जब ये तमाम तथ्य फाइलों में दबाने का प्रयास किया जाता है, तब इनका प्रकाशन करना आवश्यक हो जाता है, क्योंकि फिर संदेह का लाभ (benefit of doubt) नहीं दिया जा सकता। पूरी #KMG सीरीज, जिसकी पुस्तक भी आप सुधी पाठकों से साझा की गई है, इसी उद्देश्य से प्रेरित है।

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रेलवे बोर्ड का शीर्ष नेतृत्व बदल चुका है, और लगभग तीन हफ्ते भी बीत चुके हैं। क्या अब रेल का भी प्रवेश उत्तरायण में सुनिश्चित होगा?

बहरहाल, पहले वस्तुस्थिति को देखा जाए, रेल की आंतरिक राजनीति हमने देखी और उसके वे आयाम भी बताए, जो पहली बार देश के सामने आए हैं।

नए साल में नई बातों की प्रस्तावना, जो इस लेख से है – वह है – “Crisis of Competence” की! व्यक्ति का व्यवस्था से ऊपर हो जाना, हमने पूर्व प्रकाशित लेखों में देखा। कैसे रेलमंत्रियों ने डॉ मनमोहन सिंह और फिर माननीय मोदी जी की भी सरकार में कीमत चुकाई लेकिन AIDS का वायरस सिस्टम में बैठा रहा, यह बताया।

चलिए देखें, सोने का नाटक करने वाले उठाकर बाहर किए जाएंगे कि नहीं, अब यह देखा जाएगा!

– एक महिला चलती ट्रेन में टॉयलेट जाती है, और फ्लश का बटन दबाते ही गंदगी फ्लश न होकर, सीधे उसके ऊपर फ्लश हो जाती है! 30 अप्रैल 2022 – टॉयलेट की गंदगी यात्री पर पंप हुई, फर्म पर मढ़ा गया दोष, बरी हुए अधिकारी!

– ट्रेन प्लेटफार्म पर चढ़ जाती है और वेटिंग रूम तोड़ देती है! 23 नवंबर 2022 – Kalyug – Now Train Climbs Platform and Kills! कुछ ऐसी ही घटना 1895 – Montparnasse derailment – में हुई थी, जिसके बाद ट्रेन के ब्रेक्स में बहुत काम हुआ।

लेकिन बलिहारी है दिल्ली के मूर्धन्य सपूतों की, जिन्होंने आज देश की सारी वैगन फ्लीट को कुछ ऐसी ही परिस्थिति में डाल दिया है। लाखों-करोड़ों के निवेश के बाद भी, आज भारतीय रेल अपनी मालगाड़ियों की गति सीमा बढ़ा नहीं, घाटा रही है! आज भी विदेशी कंपनियां और प्राइवेट वेंडर रेल व्यवस्था को अपने हिसाब से तोड़-मरोड़ रहे हैं, परंतु रेलवे बोर्ड किंकर्तव्यविमूढ़ होकर बेबस खड़ा है! 29 दिसंबर 2022 – Erratic brakes in goods trains: Railways decides to reduce speed further इसीलिए दिल्ली के इन ‘सपूतों’ को #KMG के नाम से जाना जाता रहा है और दिल्ली में डटे रहने की फितरत को #AIDS कहा जाता है।

1895 का एक्सीडेंट – जो ब्रेक फेल होने के कारण हुआ।
प्लेटफार्म पर चढ़ी ट्रेन।

– एक साधारण व्यक्ति प्लेटफार्म पर खड़ा है और इलेक्ट्रोकट हो जाता है! – 11 दिसंबर, 2022 – Electrocution on the platform: असुरक्षित हो गया पूरा रेल परिसर?

– #FOB पर चलते यात्री नीचे ट्रैक पर गिर जाते हैं! 28 नवंबर 2022 – Failure of FOB in Balharshah-Indian Railway’s Morbi

– एक यात्री सीट पर शांति से बैठा संभवतः अपने गंतव्य की योजना पर विचारमग्न था तभी रेल की कंस्ट्रक्शन साइट से एक सब्बल चलती ट्रेन में उसकी गर्दन भेदकर उसे हमेशा के लिए निश्चेष्ट कर देता है! 4 दिसंबर 2022 – हरिकेश की मर्माहत मृत्यु – और क्या-क्या दिखाएगा ये खान मार्केट गैंग? पार्ट-1

– ब्रेक फेल होने के कारण एक मालगाड़ी को कंट्रोल्ड डिरेलमेंट कराकर रोका जाता है!

https://www.indiatoday.in/india/story/coal-laden-goods-train-derails-engine-drags-coach-bihar-gaya-koderma-gurpa-railway-station-2289881-2022-10-27

– डिफेक्टिव स्पेसिफिकेशन द्वारा खरीदे गए मधेपुरा के इंजनों की खरीद पर दुबारा 12000 एचपी के नए इंजनों की खरीद को पूर्व सीईओ ने आखिरी समय में रोका। एक ऐसा नया मॉडल #KMG लेकर आया जो न निजीकरण है, न निगमीकरण। न ही ये स्पष्टता है कि हर साल आ रहे इंजनों के लिए लॉकोशेड बनेंगे या नहीं, और नए विद्युतीकरण का क्या होगा?

ये तो रही पिछले साल की उत्कृष्ट उपलब्धि। सबसे बड़ी खबर तो #KMG_2.0 का नया अवतरण है!

13 जनवरी 2023 को एक बहुत परेशान करने वाली खबर सामने आयी – ट्रेनों में ऑनबोर्ड सेनिटेशन और बेडरोल की सफाई गुणवत्ता गई रसातल में! साफ-सफाई का ये हाल कि यात्री लिनेन से आ रही दुर्गंध से बीमार हो गए और उन्हें उपचार देना पड़ा।

इसका अर्थ यह है कि अब अगर आप प्लेटफार्म से बच गए, तो ट्रेन की सीट पर जिंदा रहेंगे, यह कहना कठिन है! शौचालय से साफ-सुथरे निकल आए तो आपको कोच की दुर्गंध डॉक्टर के पास ले जाएगी!

इसी लेख में दक्षिणपंथी सोच के अग्रणी – अजीत भारती – का निम्नांकित ट्वीट भी हमने साझा किया गया था-

रवीश कुमार जैसे धुर-वामपंथियों की नकारात्मक रिपोर्ट को नकारना तो समझ में आता है, लेकिन अजीत भारती जैसे देश के प्रति समर्पित पत्रकारों की बात भी यदि सुप्त व्यवस्था को नहीं झकझोरती है, तो निश्चित रूप से सिस्टम में कुछ तो बहुत बड़ी गड़बड़ है!

कौन हैं वे लोग, जिन्होंने व्यवस्था को तहस-नहस कर दिया है? रेल का ये कैसा नेतृत्व है कि जिसने निर्णय लेने की क्षमता ही खत्म कर दी, वो कौन हैं, कैसे दिखते हैं, जिन्होंने रेलकर्मियों को ऐसी स्थिति में ला दिया है कि आज उनसे रेल व्यवस्था नहीं चल पा रही, न ही उन्हें समझ आ रहा है कि ट्रेन में ब्रेक कैसे लगाए जाएं, बेडरोल कैसे धोया जाए, विद्युतीकरण प्लेटफार्म पर खड़े लोगों की हत्या न करे, FOB का अनुरक्षण कैसे करें?

निश्चित रूप से यह “क्राइसिस ऑफ कम्पीटेंस” है। लेकिन हां, मेसर्स उपाध्याय और सुधीर कुमार की इमोशनल इंटेलिजेंस चौकस है! क्रमशः जारी…

प्रस्तुति: सुरेश त्रिपाठी