कई बार सही बात निर्भीक होकर कहना और गलत बात का विरोध करना ‘विभागवाद’ नहीं होता, यह कब समझेंगे रेल अधिकारी!

व्यवस्था के लिए राष्ट्रहित में निर्भीक होकर अपनी बात कहना और गलत बात का विरोध करना अत्यंत आवश्यक होता है। लेकिन यह दायित्वबोध बौने और क्षुद्र लोगों में नहीं होता, … Read More

अधिकारी-वेंडर-नेक्सस का नया स्वरूप-अधिकारी स्वयं बना वेंडर, भाग-3

#Advisor साहब के आशीर्वाद से गणेश बाबू और #RKRai के संरक्षण से रवि बाबू रेल सर्विस में रहते हुए बिजनेसमैन बने! रेल में सर्विस करते-करते अधिकारी व्यापारी बन गए, लंबे … Read More

रिटायरमेंट से कुछ दिन पहले DG/RDSO की चिट्ठी का निहितार्थ और औचित्य क्या है-विचार करें मंत्री जी!

यह कैसा ट्रांसफॉर्मेशन है-जो रेल में गहरे तक व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ सबसे बड़े पालिसी रिफार्म को कमजोर करने की मुहिम का नेतृत्व करने जा रहा है मंत्री जी? #Railwhispers … Read More

अधिकारी-वेंडर-नेक्सस का नया स्वरूप-अधिकारी स्वयं बना वेंडर! भाग-2

रेलमंत्री जी, आपका 3 अप्रैल का वक्तव्य अधिकारियों को यह भरोसा दिलाता है कि जिनके पास प्रोटेक्शन पाने के लिए पैसे नहीं हैं, उन्हें आप प्रोटेक्ट करेंगे! रेल मंत्रालय एक … Read More

कार्टेल विशेष के फेवर में लाई गई थी अंतरिम अप्रूव्ड कैटेगरी: खुल रही हैं बोर्ड विजिलेंस के संरक्षण में पलते भ्रष्टाचार की परतें!

The ‘invention of interim approved criteria’ was to grant interim approval to favour few vendors who manufactured locomotive shells, final beneficiaries were – Chandra Udyog, Selvoc, and Bhilai Iron & … Read More