In the #KMG controlled Rail-system, Rear End Collision-Train Brakes Yet Again?
चिंताजनक रूप से मालगाड़ियों की टक्कर (#collision) लगातार हो रही हैं। बुधवार, 19 अप्रैल की सुबह एक खड़ी मालगाड़ी, जिसके पीछे बैंकर की तरह #WAG9 लोको लगा था, से एक #WAG9_Multi से चालित मालगाड़ी सिग्नल ओवरशूट करके कोलाइड कर गई। प्राथमिक जानकारी का मैसेज यह रहा-
Sir,
Home signal overshoot and dashed to Rear loco at SNGP yard
Trn. No. BO-BRS
Power- 34067+34077
BPC- 50000530100/BIA/02.04.23/PP13
Ex-DCSD
Leading LP – M C Meena/SDL
Trailing LP – Rajesh Prasad/SDL

Trn. No. N-NPSB
Power- 43256/33888
BPC-50000535492/KRBA/18.04.23/INT
Load-58+1
Ex-OKSR
LP – Vinod Kr/BSP
ALP – Anand Tiwari/BSP

06:25 – BO-BRS arrived SNGP L No. 03
06:45 – N-NPSB dashed with BO-BRS in rear as LP overshooted SNGP home signal. Both Loco derailed and approx. 10 to 15 wagons derailed. Also L. No. 04 N-PSSS previously standing 4-5 wagons derailed.
06:55 – SDL ART ordered via SCR O.No- 04
07:00 – MDGR Tool Van ordered via SCR O.No- 20
07:15 – ART BSP ordered
07:18 – 140T BSP ordered by SCR O. No- 10
07:20 – 140T NKJ ordered ASAP.
दोपहर तक इस घटना को राष्ट्रीय अखबारों ने प्रकाशित कर दिया-
शाम को दक्षिण रेलवे का एक पत्र संज्ञान में आया-

इस पत्र से पता चला कि लोको पायलट को प्रॉपर रेस्ट नहीं मिला था और वह 14 घंटे (सोशल मीडिया में चल रही पोस्टों के अनुसार 15 घंटे से अधिक) से ड्यूटी कर रहा था। साथ ही यह भी पता चला कि जब उक्त मालगाड़ी सिग्नल ओवरशूट कर खड़ी मालगाड़ी से टकराई, तो उसकी गति 67 किमी प्रति घंटा थी और इसके 71% डिब्बे नॉर ब्रेमसे #BMBS ब्रेक सिस्टम से युक्त थे जिनमें #RDSO ने माना है कि इसमें पहले से जानकारी में रही विसंगति है।
ऐसे में कुछ प्रश्न उपस्थित होते हैं-
हमने एक्सीडेंट के वीडियो 6-7 अधिकारियों और ट्रेन ऑपरेशन के अनुभवी और लोकों शेड्स में कार्यरत कुछ सुपरवाइजरों से साझा करके उन पर उनकी राय मांगी। उनकी टिप्पणी कुछ इस प्रकार है – (इन्हें संपादित किया गया है)-
– MU WAG9 was thrown aside and one #loco climbed the rear loco of standing train. Both trains were loaded. The energy needed to throw 250 tons of WAG9 MU looks consistent with collision of loaded train moving at 67 kmph in to another loaded train.
– Home signal is on 1 in 200 falling grade. Loaded train should not have been moving at 67 kmph. A Joint Procedure Order (#JPO) was issued on 17.01.2023 by Railway Board two tables given in that JPO are-


– So, if we go by facts mentioned in #CELE/SR’s letter, one finds that speed should have been 50 kmph or less, if home was green. Also for #BOBRN maximum target percentage of #Knorr_BMBS should have been 35%-reportedly it was 71%.
– Train clearly was picking speed as it was over even the permissible speed on level, so there is prima facie case of brake failure. Since the following train was hauled by a #MU_WAG9, its own brake needs to be seen.
– Did the two locos have same type of #brake_systems and were they configured correctly?
ऐसी ही पिछली एक दुर्घटना के बाद #Railwhispers ने लिखा था-
“#बीएमबीएस में ‘जानी-पहचानी विसंगति’ थी, तो यह सिस्टम बीस सालों से लगातार जारी क्यों रहा?”
“#Kalyug – Now Train Climbs Platform and Kills”
ऐसी ही दर्दनाक/अनपेक्षित दुर्घटनाओं के परिप्रेक्ष्य में यह कहना पड़ता है कि जिन अधिकारियों को फील्ड में काम करने का पर्याप्त अनुभव नहीं है, जिन्होंने कभी कोई कठिन निर्णय नहीं लिया, जटिल परिस्थितियों का सामना नहीं किया, इधर-उधर सुविधाजनक पदों पर रहकर आज वह रेल भवन के महत्वपूर्ण पदों पर बैठकर अपने बचकाने निर्णयों से फील्ड में कार्यरत कर्मचारियों/अधिकारियों की असमय मौत का कारण बन रहे हैं! यही है #KMG नियंत्रित रेल-सिस्टम! जिसके चलते न तो रेल का कोई भला हो पा रहा है, न ही रेलकर्मियों और अधिकारियों का! ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी जी का रेल में अरबों-खरबों का महती निवेश व्यर्थ जा रहा है, क्योंकि इसका लाभ सर्वसामान्य जनता और रेलयात्रियों तक नहीं पहुंच पा रहा है! क्रमशः जारी..
प्रस्तुति: सुरेश त्रिपाठी

