इंजेक्शन के लिए दर-दर भटक रही अस्थमा की मरीज एक महिला रेलकर्मी
भायखला रेलवे हॉस्पिटल द्वारा चार महीने से नहीं दिया गया इंजेक्शन, अब जीएम/म.रे. को महिला रेलकर्मी ने किया लिखित निवेदन
मेडिकल भ्रष्टाचार कम करने के लिए आवश्यक है कि पैदाइशी एक ही रेलवे में जमे डॉक्टरों को अविलंब और अनिवार्य रूप से अन्य जोनों में दरबदर किया जाए!
सिग्नल एंड टेलीकम्युनिकेशन वर्कशॉप, भायखला, मध्य रेलवे में कार्यरत एक गरीब चतुर्थ श्रेणी महिला कर्मचारी दुर्गावती विश्वकर्मा को पिछले चार महीनों से वह इंजेक्शन नहीं दिया गया, जो स्वयं भायखला रेलवे अस्पताल के डॉक्टरों – डॉ सोनम एवं डॉ ज्ञानेश्वर – ने लिखा है।
विधवा महिला श्रीमती विश्वकर्मा अपने बच्चों के साथ पिछले चार महीनों से डीआरएम ऑफिस, पीसीएमडी ऑफिस के चक्कर लगा-लगाकर थक चुकी हैं। अब उन्होंने पिछले हफ्ते 7 जुलाई 2022 को मध्य रेलवे मुख्यालय में पहुंचकर महाप्रबंधक अनिल कुमार लाहोटी को अपना निवेदन देकर उनसे इंजेक्शन दिलाने की गुहार लगाई है।
निवेदन में श्रीमती विश्वकर्मा ने स्पष्ट लिखा है कि डीआरएम ऑफिस के ऊपर पीसीएमडी ऑफिस में डॉ अटारिया से मिलने गई थी, मगर उन्होंने मिलने से साफ मना करते हुए कह दिया कि इंजेक्शन नहीं मिल पाएगा। जब उन्होंने उनसे मिलने की बहुत विनती की और यह पूछा कि इंजेक्शन क्यों नहीं मिल पाएगा, तो डॉ अटारिया ने अपने चपरासी से कहला दिया कि इंजेक्शन बहुत महंगा है, हम नहीं मंगा सकते, क्योंकि हमारे पास इतना फंड नहीं है।
उन्होंने जीएम से निवेदन करते हुए लिखा है कि वह पिछले बीस साल से इस बीमारी से पीड़ित हैं और अत्यंत कष्ट में हैं। भायखला अस्पताल से उनकी यह फाइल पीसीएमडी ऑफिस को चार महीने पहले भेजी गई थी। परंतु अब तक उस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। जबकि इंजेक्शन के अभाव में उन्हें मर्मांतक पीड़ा से गुजरना पड़ रहा है। मजबूर होकर उन्हें उनकी शरण में आना पड़ा है। अतः वे उन्हें यह इंजेक्शन दिलाने की कृपा करें।
भायखला रेलवे अस्पताल में अमानवीयता, लापरवाही और दुष्टता का यह वातावरण है और इसके लिए सीधे तौर पर अस्पताल की एमडी तथा मध्य रेलवे के अकर्मण्य पीसीएमडी जिम्मेदार हैं। जानकारों का कहना है कि उच्चाधिकारियों को खुश करने के लिए तो गैरजरूरी शक्तिवर्धक दवाएं और छोटे-मोटे घरेलू मेडिकल उपकरणों की खरीदने के लिए यहां की एमडी के पास पर्याप्त फंड है, लेकिन अस्थमा की एक गरीब महिला मरीज को इलाज के लिए वह दवा, वह इंजेक्शन उपलब्ध नहीं कराया जाता है, जो स्वयं भायखला अस्पताल के डॉक्टरों ने ही लिखा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार इस विधवा चतुर्थ श्रेणी महिला कर्मचारी ने इस इंजेक्शन के लिए पीसीएमडी को भी अनुरोध किया, उनके कार्यालय के भी कई चक्कर काटे, मगर पीसीएमडी तो क्या उनके मातहत डॉक्टरों ने भी उसे मिलना तो दूर खड़ा भी नहीं किया। डॉ खटारिया का उदाहरण महिला के पत्र में ही दिया गया है। इसके साथ ही उन्होंने भी फंड नहीं होने की बात कहते हुए अपने चपरासी के माध्यम से आवश्यक इंजेक्शन उपलब्ध कराने में असमर्थता जता दी। मजबूरन कर्मचारी का परिवार अब महाप्रबंधक से मिलकर अपने लिए दवा उपलब्ध कराने की मांग कर रहा है।
उल्लेखनीय है कि भायखला रेलवे हॉस्पिटल में अनियमितताओं का बोलबाला है, लेकिन फिर भी भायखला रेलवे हॉस्पिटल की एमडी, मध्य रेल प्रशासन को भ्रमित करने में सफल हो रही हैं। वह अपनी छवि चमकाकर मध्य रेल में ही पीसीएमडी बनने के लिए प्रयासरत हैं। तथापि उपरोक्त तमाम पूर्व/वर्तमान अनियमितताओं, अमानवीय उदाहरण को देखते हुए मध्य रेल प्रशासन/रेलवे बोर्ड को अवश्य ही उनकी प्रतिभा, क्षमता, व्यवहार का आकलन करने के बाद ही उन्हें यहीं उच्च पद पर बैठाने बाबत यथोचित निर्णय करना चाहिए।
जबकि जानकारों का मानना है कि यदि इन्हें यहां पीसीएमडी बनाया जाता है, तो सेंट्रल रेलवे की पूरी मेडिकल व्यवस्था न केवल चौपट हो जाएगी, (वर्तमान केस उसका प्रत्यक्ष उदाहरण है), बल्कि रेल प्रशासन की छवि को भी भारी बट्टा लगेगा। उनका यह भी कहना है कि पूर्व एसडीजीएम के संरक्षण के चलते अब तक किसी ने भायखला रेलवे हॉस्पिटल की अनियमितताओं को जांचने का साहस नहीं किया था। यह वजह रही है, उनके रहते रेलवे बोर्ड द्वारा मांगी गई जानकारी भी अब तक नहीं भेजी गई है।
जानकारों का कहना है कि सेंट्रल रेलवे की मेडिकल व्यवस्था को सुधारने और कर्मचारियों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए पीसीएमडी के पद पर कोई प्रशासनिक रूप से सक्षम और अनुभवी मेडिकल प्रैक्टिशनर लाया जाना आवश्यक है। जबकि एमडी/भायखला सहित जो भी डॉक्टर पैदाइशी एक ही रेल में जमे हुए हैं, उन्हें अविलंब और अनिवार्य रूप से अन्य जोनों में दरबदर किया जाना चाहिए, क्योंकि प्रत्यक्ष रूप से देखने में अक्सर यह आया है कि जो भी डॉक्टर अपनी पूरी सेवा एक ही रेलवे पर कर रहे हैं, उनका व्यक्तिगत व्यवहार एवं प्रशासनिक आचरण अन्य डॉक्टरों तथा पैरामेडिकल मेडिकल स्टाफ के प्रति दुर्दांत है। मेडिकल भ्रष्टाचार इसका एक बड़ा पहलू तो है ही!
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