All vacant posts should be surrendered immediately

Incentive in workshops and production units should be abolished

Overtime to be abolished & Mileage or kilometres allowance should also be abolished

आय में गिरावट से परेशान रेलवे ने बड़े पैमाने पर शुरू की खर्चों में कटौती

यात्री और माल परिवहन में कमी और आय में गिरावट से परेशान रेलवे ने बड़े पैमाने पर खर्चों में कटौती का अभियान चलाया है। आय बढ़ाने के लिए माल भाड़ा और यात्री किराए में छूट की स्कीमें लागू करने के बाद अब अनावश्यक पदों को खत्म करने और गैरजरूरी खर्च में कटौती के प्रयास किए जा रहे हैं।

इस संबंध में रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल महाप्रबंधकों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश जारी किए हैं। उनसे कहा गया है कि वे अपने-अपने जोनों, इकाईयों में खर्चों में कटौती के लिए अभियान चलाएं। इसके लिए बोर्ड की ओर से बाकायदा लक्ष्य दिए गए हैं।

बिना टिकट यात्रा करने वालों के विरुद्ध अभियान

निर्देश के मुताबिक दुबारा सेवा में लिए गए सेवानिवृत्त कर्मचारियों को हटाना, समीक्षा कर फालतू अनुबंधों एवं खरीदारियों पर अंकुश लगाना, बिना टिकट यात्रा करने वालों के विरुद्ध अभियान चलाना, समस्त कैटरिंग कर्मियों को पीओएस मशीनें उपलब्ध कराना, बिना बिल के भुगतान पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना, स्टोर के सभी आइटमों की समीक्षा करना, सभी डिपो का ऑडिट तथा ईधन के उपयोग में कमी लाना शामिल है। जोनों और डिवीजनों से कहा गया है कि वे अपने सभी खर्चों का नए सिरे से आकलन करें और गैरजरूरी खर्चों को काटने के बाद ही उन्हें बोर्ड भेजें।

RLDA Invites Bids for Grant of 99 Year Lease Hold Rights for Commercial Development of Railway Land (Millennium Park) at Mettuguda.

खर्च में कटौती के अलावा और कोई चारा नहीं

यात्री और माल परिवहन में जबरदस्त गिरावट का अंदाजा रेलवे को पहली तिमाही में ही हो गया था, जिसे रोकने के लिए रेलवे बोर्ड ने सितंबर में ग्राहकों के लिए कुछ रियायतों की घोषणा की थी। इसके तहत माल ढुलाई पर व्यस्त सीजन सरचार्ज समाप्त कर दिया गया था। जबकि एसी चेयरकार तथा एक्जीक्यूटिव क्लास (सिटिंग) वाली ट्रेनों में खाली सीटें भरने के लिए किराए में 25 प्रतिशत की छूट दे दी गई थी। लेकिन दूसरी तिमाही के आंकड़ों पर इसका कोई खास असर नहीं दिखाई देने से अब विभिन्न मदों के खर्च में कटौती के अलावा रेलवे के सामने और कोई रास्ता नहीं बचा है।

155 करोड़ से भी कम हुई यात्री आय, माल भाड़े में 3901 करोड़ की कमी

चालू वित्तीय वर्ष 2019-20 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में रेलवे को यात्री किराए और माल भाड़े के दोनों मोर्चों में गिरावट का सामना करना पड़ा है। इस दौरान जहां यात्री आय 155 करोड़ रुपये से भी कम हुई, वहीं माल ढुलाई से होने वाली आय में 3901 करोड़ रुपये की कमी आई है। दूसरी तिमाही में रेलवे को यात्री परिवहन से 13,243.81 करोड़ रुपये तथा माल परिवहन से 25,165.13 करोड़ रुपये में की आय हुई। जबकि इससे पूर्व अप्रैल-जून की पहली तिमाही में यात्री परिवहन से 13,398.92 करोड़ रुपये तथा माल परिवहन से 29066.92 करोड़ रुपये की आय हुई थी।

घटती ढुलाई के कारण नहीं पूरा हुआ वैगन खरीद का लक्ष्य

रेलवे को यात्रियों के बजाय माल ढुलाई से असली कमाई होती है। परंतु इस वर्ष घटती ढुलाई के कारण उसे वैगन खरीद का लक्ष्य घटाना पड़ा है। शुरू में इस वर्ष 10,500 वैगन खरीदने का लक्ष्य रखा गया था। जिसे पहले 5000 और फिर 1860 करना पड़ा है। जाहिर है कि आर्थिक सुस्ती रेलवे पर भारी पड़ रही है।

शायद यही वजह है कि सरकार और रेलवे बोर्ड दोनों मिलकर आय में हो रही कमी को पाटने के लिए बड़े पैमाने पर रेलकर्मियों की कटौती का एजेंडा लागू करने का निर्णय लिया है। पूर्व रेलवे ने तो अपने करीब 2000 रेल कर्मचारियों के पदों को सरेंडर करने का आदेश भी जारी कर दिया है, जबकि अन्य जोनल रेलों द्वारा भी यह प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

अनुमान लगाया जा रहा है कि चालू वित्त वर्ष की समाप्ति तक करीब तीन लाख रेलकर्मियों की छंटनी का काम पूरा कर लिया जाएगा। इस दरम्यान सैकड़ों ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों को निजी हाथों में सौंपने का लक्ष्य भी पूरा हो जाएगा। यही कारण है कि रेलवे की यूनियनों की मान्यता के चुनाव को एक बार फिर टाल दिया गया है, जिससे प्रतिरोध की कहीं कोई गुंजाइश ही न रह जाए।

इस संदर्भ में एक मान्यताप्राप्त जोनल यूनियन के एक बड़े पदाधिकारी ने पूछे जाने पर जो कुछ कहा, वह उन्हीं के शब्दों में- “It is really shocking.. Trade unions must forge an strong alliance discarding their respective ideological and self-centered aspirations and must formulate strategy for a combined resistance movement which will include direct action programs.”

इंजिनीरिंग विभाग, विद्युत विभाग, एसएंडटी विभाग द्वारा अनाप-सनाप एस्टीमेट बनाकर टेंडर किये जा रहे हैं। खर्च पर कोई लगाम नहीं हैं। जो सफाई का ठेका पहले कमर्शियल विभाग द्वारा अब तक 2-3 करोड़ का दिया जा रहा था, उसे 15-20 करोड़ पर ईएनएचएम (लूटम) विभाग द्वारा कर दिया गया हैं। रेलवे की अर्निंग करने (कमर्शियल) और चलाने वाले (ऑपरेशन) दोनों विभागों को स्वतंत्र निर्णय लेने का अधिकार नहीं रह गया है। रेलवे की इस दुर्दशा के लिए रेल प्रशासन के साथ ही यूनियनें भी समान रूप से जिम्मेदार हैं।