सीवीसी के निर्देशों को नहीं मानता रेलवे बोर्ड विजिलेंस!
गोरखपुर ब्यूरो: रेलवे भर्ती बोर्ड, गोरखपुर में हुई अनियमिताओं की शिकायतों की जांच रेलवे बोर्ड विजिलेंस के इंवेस्टिगेटिंग इंस्पेक्टर (आईआई) अतुल कुमार श्रीवास्तव की टीम द्वारा की गई थी तथा उनके द्वारा इस संदर्भ में, रेलवे भर्ती बोर्ड (#RRB), गोरखपुर के एक ग्रुप ‘ए’ अधिकारी, और ग्रुप ‘सी’ एवं ग्रुप ‘डी’ के दो कर्मचारियों के विरुद्ध मेजर पेनल्टी चार्जशीट जारी करने की अनुशंसा की गई थी।
उक्त मामले में पूर्वोत्तर रेलवे सतर्कता विभाग द्वारा मेजर पेनल्टी चार्जशीट जारी कर विभागीय जांच भी की गई। इसी परिपेक्ष में विभागीय कार्यवाही के साथ-साथ यह मामला सीबीआई को भी जांच के लिए रेलवे बोर्ड विजिलेंस के आदेशों के अनुपालन में पूर्वोत्तर रेलवे सतर्कता संगठन गोरखपुर द्वारा भेजा गया था।
तत्पश्चात सीबीआई द्वारा सभी आरोपियों के आवासों पर 7 अगस्त 2025 को की गई रेड के पश्चात सीबीआई की वेबसाइट पर निम्न सूचनाएं एवं कारणों के निम्नलिखित बिंदु उभरकर सामने आए-
- सीबीआई द्वारा एफआईआर के साथ-साथ रेलवे बोर्ड विजिलेंस द्वारा प्रस्तुत जाँच रिपोर्ट—जो अतुल कुमार श्रीवास्तव, आईआई/रेलवे बोर्ड द्वारा हस्ताक्षरित है—अपलोड की गई।
- उक्त जाँच रिपोर्ट में यह अनुशंसा की गई कि पी. के. राय, पूर्व चेयरमैन, आरआरबी/गोरखपुर, वी. के. श्रीवास्तव, तत्कालीन वरिष्ठ तकनीशियन, आरआरबी/गोरखपुर (वर्तमान में पीसीईई/कार्यालय, गोरखपुर में पदस्थ) तथा वरुण राज मिश्रा, तत्कालीन कार्यालय सहायक, आरआरबी/गोरखपुर के विरुद्ध मेजर पेनल्टी की कार्यवाही प्रारंभ की जाए।
- तदनुसार उपरोक्त तीनों आरोपी अधिकारियों/कर्मचारियों को उनके अनुशासनिक प्राधिकारी द्वारा मेजर पेनल्टी का आरोप-पत्र जारी किया गया।
उपरोक्त तथ्यों से यह संज्ञान में आया कि चूँकि इस मामले में एक ग्रुप ’ए’ अधिकारी के साथ-साथ ग्रुप ‘सी’ एवं ग्रुप ‘डी’ के दो कर्मचारी भी सम्मिलित हैं, अतः यह एक संयुक्त मामला बनता है।
ऐसी स्थिति में सीवीसी मैनुअल के पैरा 207.3 के अनुसार सीवीसी की प्रथम चरण की सलाह (फर्स्ट स्टेज एडवाइस) आवश्यक थी। उक्त पैरा इस प्रकार है-
“संयुक्त मामले में, जिसमें राजपत्रित अधिकारी तथा अराजपत्रित कर्मचारी सम्मिलित हों, यदि मामले में कोई ग्रुप ‘ए’ अधिकारी सम्मिलित है, तो सभी आरोपी अधिकारियों/कर्मचारियों के लिए, उनके पद–स्तर का ध्यान रखे बिना, सीवीसी की एडवाइस आवश्यक होगी।”
मामले की गहराई से छानबीन करने पर पता चला कि सीवीसी के उपरोक्त निर्देशों का उल्लंघन करते हुए उपरोक्त मामले में सीवीसी से किसी प्रकार की एडवाइस नहीं ली गई।
इसके अलावा, सीवीसी के पत्र संख्या 99/VIG/66, दिनांक 28 सितंबर 2000 के अनुसार, सीवीसी की फर्स्ट स्टेज एडवाइस चार्जशीट (आरोप-पत्र) के साथ सभी संबंधित आरोपियों को उपलब्ध कराई जानी अनिवार्य होती है।
जबकि उपरोक्त मामले में ऐसी कोई एडवाइस उक्त तीनों आरोपियों को मेजर पेनल्टी चार्जशीट के साथ संलग्न कर नहीं दी गई थी—जो कि एक घोर अनियमितता और सीवीसी के निर्देशों का खुला उल्लंघन है।
इसके अतिरिक्त नियमानुसार, संयुक्त (कंपोजिट) केस में सभी आरोपियों के केस उसी एक ही जांच अधिकारी को अनुशासनिक जांच के लिए भेजा जाना चाहिए था जिसे पी. के. राय, पूर्व चेयरमैन/आरआरबी/गोरखपुर—जो इस संयुक्त मामले में ग्रुप ‘ए’ अधिकारी हैं—के प्रकरण में जाँच हेतु नामित किया गया है।
इसके अतिरिक्त सीवीसी मैनुअल 2021 के पैरा 5.2 के अनुसार सतर्कता एजेंसी और सीबीआई द्वारा समानांतर जाँच के विषय में निम्न आदेश दिए गए हैं-
“जब किसी मामले को जाँच के लिए सीबीआई को संदर्भित कर दिया गया हो और सीबीआई द्वारा उसे स्वीकार कर लिया गया हो, तो आगे की जाँच सीबीआई पर ही छोड़ दी जानी चाहिए और विभागीय एजेंसियों द्वारा समानांतर जाँच से बचा जाना चाहिए। ऐसे मामलों में विभाग द्वारा आगे की कोई भी कार्रवाई सीबीआई की जाँच पूरी होने के बाद ही की जानी चाहिए।“
जबकि सीवीसी की उपरोक्त गाइडलाइन का उल्लंघन करते हुए रेलवे बोर्ड विजिलेंस द्वारा समानांतर जांच एवं अनुशासनिक कार्यवाही आज भी जारी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार इस मामले में कथित आईआई/रेलवे बोर्ड अतुल कुमार श्रीवास्तव, जो कि बोर्ड विजिलेंस में मात्र एक क्लर्क की भूमिका में है, पूर्वोत्तर रेलवे विजिलेंस पर दबाव बनाकर एक कर्मचारी को जबरन नौकरी से निकलवा चुका है और दूसरे कर्मचारी को भी बर्खास्त करने के लिए लगातार दबाव बनाए हुए है, जबकि आरआरबी में हुई कथित अनियमितताओं के लिए उक्त कर्मचारियों को किसी भी तरह से जांच में दोषी नहीं पाया गया है।
ऐसी स्थिति में प्रश्न यह उठता है कि क्या रेलवे बोर्ड विजिलेंस में अतुल कुमार श्रीवास्तव जैसे खुंदकी, सैडिस्ट लोगों की ही चलती है और बाकी पीईडी/विजिलेंस एवं अन्य संबंधित विजिलेंस अधिकारी उनकी इन सब गतिविधियों से अनजान रहते हैं?
सीवीसी से अनुरोध है कि इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच की जाए और रेलवे बोर्ड विजिलेंस के दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए उन पर तत्काल उचित दंडात्मक कार्यवाही की जाए।

