अधिकारियों के लालच के चलते ‘कवच’ कहीं यात्रियों का ‘काल’ न बन जाए!
#Railwhispers के संज्ञान में कवच पर अमल में नियमों-निर्देशों का गंभीर उल्लंघन और रेलयात्रियों की संरक्षा को गंभीर खतरे में डालने संबंधी मामला आया है, जिसमें रेलवे के ड्रीम प्रोजेक्ट #KAVACH के कार्यान्वयन में कदाचार और मनमानी भी शामिल है, जो सीधे तौर पर यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ा है।
ज्ञातव्य है कि इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड को #PCSTE/SWR द्वारा दक्षिण पश्चिम रेलवे के बेंगलुरु और मैसूरु डिवीजनों के 778 रूट किलोमीटर से अधिक के कवच का लगभग ₹192 करोड़ का टेंडर दिया गया है।
#Ep121: ‘कवच’ कहीं ‘काल’ न बन जाए!
विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार सीजीएम-एसएंडटी/इरकॉन ने भारतीय रेल की जनरल कंडीशंस ऑफ काँट्रेक्ट (जीसीसी) और सीवीसी के दिशानिर्देशों का गंभीर उल्लंघन किया है और ओएफसी बिछाने एवं टावर खड़े करने संबंधी लगभग ₹100 करोड़ के कार्यों के लिए एक ऐसे सब-कांट्रेक्टर को नियुक्त किया है, जिसके पास संबंधित कार्य का कोई पूर्व अनुभव नहीं है। इसमें टेंडर की कंडीशन को भी अनदेखा किया गया है।
सीजीएम/एसएंडटी/इरकॉन ने सीवीसी के दिशानिर्देशों के अनुसार खुली निविदा आमंत्रित किए बिना, एक ऐसी निजी फर्म को सब-काँट्रेक्ट दे दिया है जिसके पास ओएफसी बिछाने और टावर खड़ा करने संबंधी कार्यों का कोई पूर्व अनुभव नहीं है। आरोप है कि यह जानबूझकर व्यक्तिगत लाभ के लिए किया गया है, क्योंकि इसमें भारतीय रेल की जीसीसी के मानदंडों तथा सीवीसी के दिशानिर्देशों को अनदेखा करने के साथ ही संबंधित टेंडर की एक महत्वपूर्ण कंडीशन को भी दरकिनार किया गया है, जिसमें दिए गए कार्य का 35% अनुभव होना आवश्यक है।
यह ज्ञात नहीं है कि पीसीएसटीई/एसडब्ल्यूआर ने इरकॉन को ऐसे सब-कांट्रेक्टर को नियुक्त करने की अनुमति कैसे और क्यों दी? तथापि पूछे जाने पर #PCSTE/SWR सुनिश्चित नहीं हैं कि इरकॉन द्वारा यह अप्रूवल लिया गया है या नहीं। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि यह प्रोसेस में हो। मगर प्रश्न यह है कि यदि यह प्रोसेस में है, तो इरकॉन ने बिना प्रोसेस पूरा हुए यह सब-काँट्रेक्ट पहले ही कैसे दे दिया, वह भी एक ऐसी निजी फर्म को—जिसे उक्त कार्य का कोई पूर्व अनुभव नहीं है!
जानकारों का मानना है कि कवच के मामले में हर जोनल रेलवे अलग-अलग मानदंड अपना रहा है, यह उचित नहीं है, इससे भविष्य में यात्रियों की संरक्षा और सुरक्षा गंभीर खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि रेल में निर्धारित नियमों और दिशानिर्देशों की अनदेखी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं, और जहां तक संबंधित टेंडर की बात है, तो इसमें टेंडर की ही एक महत्वपूर्ण शर्त (35% कार्य अनुभव) का खुला उल्लंघन हुआ है, यह एक गंभीर कदाचार का मामला लगता है।
इस गंभीर मामले की हमारी टीम द्वारा गहराई से जाँच की जा रही है और निर्दोष यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाली ऐसी गतिविधियों को रोकने और रेलमंत्री के संज्ञान में लाने के लिए और सबूत इकट्ठा किए जा रहे हैं। आवश्यकता पड़ी तो आरटीआई में जानकारी भी माँगी जाएगी और सीवीसी को भी मामले से अवगत कराया जाएगा।

