मंत्री जी, यदि यह छोटा सा सुधार नहीं कर पाए, तो रेलवे में सुधार के आपके प्रयासों का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा!
#मोदी सरकार के भ्रष्टाचार के विरुद्ध अभियान में अगर किसी एक विभाग की प्रमुख भूमिका है तो वो है रेल मंत्रालय, और रेलवे बोर्ड पर काबिज माफिया तंत्र—खान मार्केट गैंग (#KMG) और ऑल इंडिया डेल्ही सर्विस (#AIDS)।
रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव जी ने 52 हफ्तों में 52 सुधारों की घोषणा की थी, लेकिन इस माफिया तंत्र ने उनकी घोषणा का मजाक बना दिया। इतना ही नहीं, बल्कि रेलवे में बढ़ रहे भ्रष्टाचार में उनके मंत्री सेल को ही सहभागी बना दिया।
मंत्री महोदय को वर्षों से #रोटेशन-पालिसी को कड़ाई से लागू करने का आग्रह किया जा रहा है, लेकिन उनके आँख-कान बने मंत्री सेल और आखों का तारा बने #CRB-ऑन-कांट्रैक्ट ने सारा गुड़ गोबर कर दिया।
#Rotation के नाम पर कुछ भी नहीं हो रहा है, “जिसकी लट्ठ उसकी भैंस” की तर्ज पर रेलवे में काम हो रहा है। #HAG ऑर्डर्स की बाढ़ आयी हुई है। सारे वरिष्ठ अधिकारी अपनी-अपनी जुगाड़ पोस्टिंग में लग गए हैं। जिस जोनल रेलवे में शुरू से काम किए, सब उसी रेलवे में #PHOD बनने की जुगाड़ में लगे हैं।
यह जुगाड़ और कुछ नहीं, बल्कि अपने भ्रष्टाचार के साम्राज्य को बचाने का तरीका है, और ये बात रेलवे बोर्ड और उसके चेयरमैन भली-भांति जानते हैं, लेकिन उनका स्वार्थ भी रेलवे के सुधार के आड़े आ जा रहा है। रेल अधिकारियों के स्वार्थ और लालच के कारण नुकसान रेलवे की छवि का हो रहा है।
मंत्री जी, आपसे पुनः आग्रह है कि एक नियम यह बनाइए कि कोई अधिकारी—जो जिस जोनल रेलवे में कभी भी किसी स्तर पर काम किया हो—उसे कम से कम उस जोनल रेलवे में विभाग प्रमुख, डीआरएम, एडीआरएम, एसडीजीएम, एजीएम और जीएम किसी भी सूरत में न बनाया जाए।
यह एकमात्र रिफॉर्म पूरी भारतीय रेल की आंतरिक कार्य प्रणाली को बहुत हद तक सुधार देगा। इसके साथ ही इस एकमात्र सुधार से रेलवे में भ्रष्टाचार कम से कम 90% तक समाप्त हो जाएगा। अगर मंत्री जी आप यह एक छोटा सा सुधार नहीं कर पाए, तो रेलवे में सुधार की आपकी बातों का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा!

