कुछ बेहोश हैं, तो कुछ मदहोश!
डबल कॉन्ट्रैक्ट एक्सटेंशन लिए चेयरमैन की नौ अक्टूबर की वीडियो कांफ्रेंस (वीसी) के बारे में हमने एक वीडियो बनाया था—वीडियो का लिंक यहाँ नीचे दिया गया है—जो रेल सिस्टम में लेवल 12-13 के अधिकारियों के इनपुट पर आधारित था। ये अधिकारी रेल के भविष्य की नींव हैं। काफी असंतुष्ट दिखाई दे रहे इन अधिकारियों की बात हमने इस वीडियो रिपोर्ट के माध्यम से रेल प्रशासन के सामने रखने का प्रयास किया।
Ep129: CRB की मंथली सेफ्टी मीटिंग और बेहोशी में चल रही व्यवस्था!
लेकिन इस वीडियो रिपोर्ट के बाद लेवल 15, 16 और 17 के सेवारत और सेवानिवृत्त अधिकारियों के कई फोन आए।
नई जानकारी का ब्यौरा कुछ ऐसा है—चेयरमैन साहब की मीटिंग दो घंटे नहीं, बल्कि चार घंटे से कुछ अधिक ही चली थी। सवा दो घंटे का तो केवल उनका ‘मोनोलॉग’ था, जिसमें उन्होंने सभी जोनल रेलों से प्रश्न पूछे और उनको यह बताया कि कैसे उन्हें जो पता है वह फील्ड के अधिकारियों को भी पता नहीं है।
इसी दौरान चेयरमैन ने अपने ज्ञान के आधार पर एक वरिष्ठ मंडल इंजीनियर (#SrDEN) की अनभिज्ञता पर अपनी अनचाही प्रतिक्रिया दे डाली। उत्तर पश्चिम रेलवे (#NWR) की सेफ्टी इस समय एकदम पैदल है—सारा ध्यान मंत्री के दौरों पर, उद्घाटन के कार्यक्रमों पर टिका हुआ है, जिससे ऐसा आभास हो रहा है कि रेल अधिकारी, आजकल अधिकारी कम—पार्टी कार्यकर्ता ज्यादा लगने लगे हैं।
जो ध्यान है, वह रेलवे स्टेशनों को एयरपोर्ट बनाने और नॉन-फेयर रेवेन्यू (#NFR) कमाने के नाम पर बॉडी मसाज सेंटर, ब्यूटी पार्लर और हेयर ड्रेसिंग जैसे फालतू आउटलेट्स के वीडियो बनाकर, लीडर्स ग्रुप में अपने नंबर बढ़ाए जा रहे हैं और सोशल मीडिया पर लाइक जुटाए जा रहे हैं, मगर रेलवे स्टेशनों और चलती ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा/संरक्षा को सुनिश्चित करने और उन्हें परेशानी से बचाने के लिए अवैध हाकर/वेंडर्स की रोकथाम हेतु कुछ भी नहीं किया जा रहा है। इस ट्वीट को देखें-
कुल मिलाकर बात यह है कि बस पटरी पर पहिए को चलाने की बात न की जाए। गाड़ियाँ आजकल वैसे भी टाइम टेबल से नहीं, कैलेंडर से चलने लगी हैं, और आश्चर्य यह कि रेल सिस्टम में इस बात की चिंता किसी को भी नहीं है। तो फिर नो चिंता, नॉट फिकर! क्योंकि किसी को भी किसी का भय या डर नहीं है! सब स्वतंत्र रूप से आजाद हैं!
यह भी पता चला कि सवाई माधोपुर में बिना प्रॉपर मैनपावर के यार्ड चलाने की बात रेलवे बोर्ड के डायरेक्टर जनरल/संरक्षा (#DGSafety) ने पकड़ी। उन्होंने महाप्रबंधक/पश्चिम मध्य रेलवे (#GMWCR) को भी आड़े हाथों लिया और चेयरमैन को भी अप्रत्यक्ष रूप से जता दिया कि सेफ्टी केवल प्रश्न पूछकर शर्मिंदा करवाने से नहीं आती-सिस्टम बनाने से आती है, जो #IRMS के लेवल 16 और 17 का काम है।
सभी युवा रेल अधिकारी इस बात से बहुत प्रसन्न थे कि कम से कम बोर्ड के एक मेम्बर (डीजी/सेफ्टी) के पास इतना तो ज्ञान है कि वह समस्या की जड़ को सीधे पकड़कर सबको जता पाया।
वहीं डीजी/सेफ्टी—जो अपनी सीधी-सपाट टिप्पणियों के लिए जाने जाते रहे हैं—ने एक बार फिर फील्ड अधिकारियों को फील्ड में रहने पर जोर दिया और फील्ड अधिकारियों की बहुत व्यावहारिक बातें सबके सामने रखीं। उन्होंने कहा—“वीसी बहुत होती हैं, सब कामों का, फाइल, अधिकारियों का माप—इन्हीं वीसी या ह्वाट्सऐप के मैसेज से निर्धारित हो रहा है। वीसी में केवल वीसी का ही समय नहीं लगता, उसके पहले वरिष्ठ अधिकारी से मीटिंग की तैयारी भी होती है, मीटिंग के मिनिट्स बनते हैं, उसका कम्प्लायंस भी बनता है!”
एक मदहोशी ऐसी भी
ऐसा नहीं कि यह केवल डीजी/सेफ्टी का वीसी के बारे में ऐसा मानना रहा है, दो महाप्रबंधकों ने तो इस पर फील्ड अधिकारियों के दायित्वों और रेल के प्रति फील्ड में उनकी उपस्थिति के महत्व को समझते हुए स्व-विवेक से लिखित निर्देश भी जारी किए हैं, कि वीसी कम करके, फील्ड पर काम करने और उपस्थित रहने की अधिक आवश्यकता है।
वहीं मध्य रेल के नवागंतुक महाप्रबंधक ने कुछ अलग लाइन पकड़ी है। यह सर्वज्ञात है कि उन्होंने फील्ड में बहुत कम काम किया है और मंडल रेल प्रबंधक (#DRM) भी नहीं रहे हैं। वर्कशॉप में और ओपन लाइन में काम करने की अलग-अलग आवश्यकताएँ होती हैं। इसीलिए एक समय जीएम/ओपन लाइन को अलग आंका जाता था। खैर, अब तो कुछ जानी-बूझी बेवकूफियों के चलते डीआरएम बनने की भी कोई आवश्यकता नहीं रही! जिसके चलते महाप्रबंधकों की वर्तमान सहित पिछली दो-तीन लाट को देखकर व्यवस्था और बुद्धि पर केवल तरस ही खाया जा सकता है!
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जानकारी में आया है कि मध्य रेल के नवागंतुक महाप्रबंधक ने चार पन्ने का एक पत्र जारी किया है, जिसमें प्रत्येक मंगलवार और गुरुवार को मीटिंग्स रखी हैं। मंगलवार की मीटिंग की तैयारी सोमवार को और गुरुवार की मीटिंग की तैयारी बुधवार को, हफ्ते के चार दिन तो ऐसे ही निकल गए।
जब चेयरमैन टेंडर्स की चर्चा हजार लोगों के सामने वीसी में करते हैं और महाप्रबंधकों से कमिटमेंट लेते हैं कि टेंडर कब फाइनल होगा, तो हफ्ते में चार दिन वीसी में बैठने की आवश्यकता बहुत बड़ी नहीं लगती। ध्यान देने की बात ये है कि वीडियो सर्विलांस सिस्टम (#VSS) के टेंडर जल्दी से जल्दी फाइनल करने का भी प्रेशर बनाया जा रहा है।
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यह ध्यान देने की बात है कि GM/CLW—जिनका उल्लेख इस लेख में आया है—वही मध्य रेल के नवागंतुक GM हैं।
दबे स्वरों में ये बात हो रही है कि ओपन लाइन अथवा फील्ड में काम न करने के अनुभव का अभाव—जो उनकी मीटिंग्स में स्पष्ट दिख रहा है—इसीलिए इस तरह की रिव्यू मीटिंग्स से वह टेंडर्स को जल्दी फाइनल करने पर दबाव बनाएँगे। विभाग प्रमुख (#PHOD) ये नहीं समझ पा रहे हैं कि प्राथमिकता—जो 30 सितंबर तक रेल सेफ्टी थी—अब वह तुरंत टेंडर फाइनल करने पर कैसे कर दें? वहीं, मुंबई के अधिकारी सिर पकड़कर बैठे हैं, क्योंकि उनके रिव्यू तो रोज हो रहे हैं और काम करने का समय अब और एक्सटेंडेड वीसी में निकलेगा।
आशा है रेल पहियों को पटरी पर रखने की जिम्मेदारी तड़क-भड़क के कार्यक्रम करवाने के ऊपर समझी जाएगी, जैसा प्रधानमंत्री क्लोज डोर मीटिंग्स में कई बार बोल चुके हैं। काम सीखा भी जा सकता है, लेकिन यदि डांट-डपटकर या डरा-धमकाकर अथवा सार्वजनिक रूप से अपमानित करके काम करवाना है, तो चेयरमैन, मेंबर और जीएम स्तर के बड़े अधिकारी यह याद रखें कि पुराना समय निकल चुका है।
प्रोडक्शन यूनिट या वर्कशॉप में एक छोटे शहर या कस्बे में छुप-छुपाकर काम चल जाता है, लेकिन बड़ी रेलवे या ओपन लाइन पर आपके हर क्रियाकलाप पर ध्यान जाता है—आपका पहनावा, आपके कपड़ों का चयन, आपके बात करने का तौर-तरीका, आपका कंठस्वर, आपका व्यक्तित्व, आपकी प्रस्तुति, आपका व्यवहार, आपकी बॉडी लैंग्वेज, आपकी भाव-भंगिमा—इत्यादि कुछ भी छिपा नहीं रहता।
डीजी/सेफ्टी की बातों और दो महाप्रबंधकों के वीसी के बारे में विचारों पर ध्यान देने की आवश्यकता है। ह्वाट्सऐप, एक्स या इंस्टाग्राम पर रेल नहीं चलती, जो पसीना बहाकर इसे चलाते हैं, इसे पटरी पर रखते हैं, रेल अधिकारी उनके साथ फील्ड में खड़े होने चाहिए—न कि ‘लीडर्स” ग्रुप और सोशल मीडिया पर बढ़िया-बढ़िया पिक्चर पोस्ट करके वाहवाही लूटने और चापलूसी की रणनीति बनाने में मगन रहना चाहिए। स्मरण रहे कि उद्घाटनों या मंत्रियों के दौरों पर बँटा हुआ ध्यान अनवरत रेल दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण है!

