अधिकारियों में बढ़ती अनुशासनहीनता के लिए जिम्मेदार कौन?

वरिष्ठ मंडल वित्त प्रबंधक (#SrDFM), लखनऊ मंडल, उत्तर रेलवे की पोस्ट पर नए अधिकारी की पोस्टिंग—रेलवे बोर्ड की नीति-नियम और दिशानिर्देशों के विरुद्ध की गई है, इस प्रकरण में पीएफए ने 15 दिन बीत जाने के बाद भी कोई कार्यवाई नहीं की। प्रशासन द्वारा इस प्रकरण का कोई उचित संज्ञान नहीं लिया गया, और यह कोई एक अकेला प्रकरण नहीं है, ऐसे प्रकरण लगभग हर विभाग प्रमुख द्वारा अपने मातहत ब्रांच अफसरों के साथ किए जाते हैं, और रेल प्रशासन को इससे कोई अंतर नहीं पड़ता। इसके परिणामस्वरूप अधिकारियों के बीच न केवल आपसी मतभेद और वैमनस्यता बढ़ती जा रही है, बल्कि इससे उनमें अनुशासनहीनता भी बढ़ी है और भ्रष्ट आचरण भी बढ़ा है!

24 Sept. 2025: “लखनऊ मंडल, उत्तर रेलवे में कुर्सी का खेल

Ep122: SrDFM/LKO की पोस्टिंग—प्रशासन में प्रहसन!

अधिकारियों का कहना है कि जीएम, सीआरबी और मेंबर फाइनेंस (एमएफ) इस प्रकरण की जांच करें कि रेलवे बोर्ड की नीति-नियम और दिशानिर्देशों के विरुद्ध यह अधिकारी लगातार डिवीजन और निर्माण संगठन में क्यों बना हुआ है?

अधिकारी पूछ रहे हैं कि क्या रेलवे बोर्ड अपनी नाक के नीचे उत्तर रेलवे में ही अपनी नीति-दिशानिर्देश लागू कराने में अक्षम है? किंकर्तव्यविमूढ़ है? और यदि ऐसा है तो इसके पीछे कारण क्या है?

वह स्पष्ट रूप से स्वीकार करते हैं कि इस मामले में अकाउंट्स और कार्मिक विभाग—लखनऊ डिवीजन और मुख्यालय बड़ौदा हाउस—के कार्यकलाप संदिग्ध हैं।

Ep125: रेल अधिकारियों में बढ़ती अनुशासनहीनता के लिए जिम्मेदार कौन?

उन्होंने कहा कि नए सीनियर डीएफएम की पत्नी को लखनऊ मंडल में सीनियर डीपीओ बनाने और पुराने सीनियर डीपीओ को लखनऊ में एडजस्ट करने के लिए डिप्टी सीपीओ, आलमबाग वर्कशॉप को जबरन छुट्टी पर भेजा गया था।

उन्होंने बताया कि लेखा और कार्मिक विभाग प्रमुखों ने बिना मुख्यालय/वर्कशॉप में पोस्टिंग के दोनों पति-पत्नी को सीधे डिवीजन में पोस्ट कर दिया। ये ऐसा अधिकारी है जो लगभग 10 साल से अधिक की सर्विस में अब तक एक बार भी मुख्यालय या वर्कशॉप में पोस्ट नहीं हुआ है।

उनका कहना है कि केवल एक यही नहीं, उत्तर रेलवे लेखा विभाग के सभी ऐसे अधिकारियों की पोस्टिंग मुख्यालय/वर्कशॉप में की जानी चाहिए, जो केवल डिवीजन और निर्माण संगठन में पोस्टिंग ले रहे हैं और मुख्यालय में अब तक एक बार भी पदस्थ नहीं किए गए हैं।

वे कहते हैं कि यदि ऐसी ही मनमानी पीएफए करेंगे, तो 8 सितंबर 2025 को जो पॉलिसी गाइडलाइन बोर्ड ने विशेष रूप से अकाउंट्स अधिकारियों की पोस्टिंग को लेकर जारी की है और उसके पैरा नंबर 2-3 में जो आदर्शवादी ज्ञान दिया गया है, उसका क्या? यदि ऐसी पॉलिसी या नीतियों का पालन ही नहीं करना है, या नहीं होना है, अथवा नहीं करवाना है, तो इन सबको उठाकर कूड़ेदान में फेंक दिया जाना चाहिए!

अधिकारियों ने बताया कि यह सर्वविदित है कि अकाउंट्स विभाग—कार्मिक मामलों की फाइलों की स्क्रूटनी करता है। जब लखनऊ मंडल में ओवर पेमेंट, सर्विस रिकॉर्ड गायब करने, यूनियन द्वारा दबाव बनाकर रिकवरी रोकने के मामले बहुतायत में हैं, तो पति-पत्नी का कार्मिक और लेखा विभाग के विभाग प्रमुख (ब्रांच ऑफिसर) के रूप में पोस्टिंग—मेकर-चेकर सिद्धांत को दरकिनार करते हुए की गई है। और यह पोस्टिंग इस सिद्धांत के उल्लंघन का सबसे बड़ा प्रमाण है।

उनका कहना है कि पहले भी ये बात सामने आ चुकी है कि लखनऊ मंडल की सीनियर डीपीओ—नए सीनियर डीएफएम की पत्नी हैं, दोनों ही रतलाम में थे, लखनऊ मंडल के पुराने सीनियर डीपीओ को यूनियन ने हटवाया और मैडम को लखनऊ में सीनियर डीपीओ बनवाया। उन्होंने बताया कि मैडम तो दिल्ली नहीं आई थीं, सीधा लखनऊ लैंडिंग किया था रतलाम से, जब आ गई तो स्पाउस ग्राउंड बनाकर पति महोदय को भी लखनऊ प्लांट किया गया पुराने को असमय हटाकर!

अधिकारियों ने बताया कि पुराने सीनियर डीपीओ—यूनियन के लिए सुविधाजनक नहीं थे, उनसे यूनियन वालों की दाल नहीं गल रही थी, उनकी गुंडागर्दी से वह डरते नहीं थे, क्योंकि उनके ससुर जी हाई कोर्ट के जज हैं, इसलिए यूनियन के दबाव में उन्हें हटा दिया गया।

अब प्रश्न ये है कि क्या यह पोस्टिंग यूनियन के कारनामों को पूरा करने के लिए की गई है कि ये दोनों ब्रांच अफसरों से मिलकर यूनियनें अपने काम करा सकें और उनकी मंशाओं पर कोई रोक न लगे? क्रमशः