RSC: काश, यह रेल संस्थान फिर से उसी रूप-उसी गरिमा में वापस हो!
मुझे लगता है—बिटवीन द लाइंस—आपके शब्दों की आवाज में यह भी सुना जा सकता कि काश, रेलवे का यह संस्थान फिर से उसी रूप-उसी गरिमा में वापस हो। गतिशक्ति विश्वविद्यालय पूरे देश में कहीं भी हो सकता है, लेकिन महाराजा का पैलेस—रेलवे की इतनी बड़ी विरासत—को कहीं दूसरी जगह नहीं ले जाया जा सकता!
प्रिय शाकिर हुसैन भाई ! अभी अभी #Railwhispers की वेबसाइट पर पढ़ा, “The last light: The RSC alias NAIR—1930-2025” Oh ! What a poetry in prose! great ! great.. indeed ! tribute to #RSC urf #NAIR, vadodara ! Really hard to believe!
एक पूरी विरासत का खत्म होना! में आपका सौभाग्य कहूँ या दुर्भाग्य, कि उस अंतिम पलों के आप गवाह बने। बड़ौदा की शान रहा है रेलवे स्टाफ कॉलेज, और न जाने कितनी पीढ़ियों के सपनों का रेल महल!
महाराजा बड़ौदा ने भी कितने खुले मन से दान दिया और रेल मंत्रालय ने भी उसे उतने ही सम्मान के साथ आज तक सजाए-बनाए रखा। कुछ लोग बड़ौदा का फेफड़ा भी कहते थे रेलवे स्टाफ कॉलेज के प्रांगण को।

मेरे पास आपसे बेहतर शब्द नहीं हैं ! आपकी धमनियों और शिराओं में जो तरंगे उठी होंगी, मैं उनका अहसास कर सकता हूँ। वे खुशी के तो बिल्कुल नहीं हैं, लेकिन सरकारी कर्मचारी की मर्यादाओं में इससे ज्यादा कहा भी नहीं जा सकता !
ऑक्सफोर्ड 1200 साल पुराना है! कैंब्रिज भी! महान इंस्टीट्यूशंस की यह विरासत होती है सदियों तक आने वाली पीढ़ियों को एक रोशनी देने के लिए ! रेलवे स्टाफ कॉलेज ने अपना वह दायित्व बहुत अच्छी तरह निभाया। यह मोहम्मद तुगलक की तरह दिल्ली से दौलताबाद.. की तरह नहीं हो सकता।

कई वर्षों से रेलवे स्टाफ कॉलेज से जुड़े संवेदनशील लोगों की आत्मा रोज धड़क रही थी लेकिन वे सब चुप रहते थे और अभी भी रहेंगे, क्योंकि कंडक्ट रूल्स में उन्हें ऐसा रटाया है। तोता बनाया है। जबकि हम भूल जाते हैं कि किसी बड़े उद्देश्य के लिए राष्ट्र या इंस्टीट्यूट के हित में बोलना ज्यादा बड़ी राष्ट्रभक्ति होती है।
मुझे लगता है—बिटवीन द लाइंस—आपके शब्दों की आवाज में यह भी सुना जा सकता कि काश, रेलवे का यह संस्थान फिर से उसी रूप-उसी गरिमा में वापस हो। गतिशक्ति विश्वविद्यालय या किसी भी संस्थान के लिए, तो मैंने सुना है कि अलग बड़ौदा में जगह भी दी गई है। पूरे देश में कहीं भी हो सकता है, लेकिन महाराजा का पैलेस—रेलवे की इतनी बड़ी विरासत—को कहीं दूसरी जगह नहीं ले जाया जा सकता!

आपसे बेहतर शब्द मेरे पास नहीं हैं ! आपको पढ़ते हुए याद आया, “our sweetest songs are saddest indeed!” ईश्वर ही भला करे!
रेल मंत्रालय और रेल से जुड़े हर कर्मचारी और आपके लिए अनंत शुभकामनाएं!
त्रिपाठी जी, मैं वेबसाइट पर अपनी यह भावना लिखने की जगह खोज नहीं पाया। आप इसे छापेंगे मुझे खुशी होगी। यह मेरी विनम्र श्रद्धांजलि है उस महान इंस्टीट्यूशंस के लिए, जिसने बहुत गंभीर व्यक्तित्वों को तराशा-प्रशिक्षित किया, और भारतीय रेल का अत्यंत प्रतिभाशाली व्यक्तित्व उपलब्ध कराया। ईश्वर, आपका भला करें ऐसी चीजों को जगह देने के लिए।
#प्रेमपालशर्मा, पूर्व फैकल्टी-रेलवे स्टाफ कॉलेज 1996-01
August 3, 2025

