कैबिनेट ने रेलवे की चार मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को दी मंजूरी
महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा और झारखंड राज्यों के 13 जिलों को मिलेगा लाभ
इन परियोजनाओं से भारतीय रेल का वर्तमान नेटवर्क लगभग 574 किलोमीटर बढ़ जाएगा
इन परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत लगभग ₹11,169 करोड़ है और ये 2028-29 तक पूरी की जाएँगी
इन परियोजनाओं से निर्माण के दौरान लगभग 229 लाख मानव दिवसों का प्रत्यक्ष रोजगार भी सृजित होगा
नई दिल्ली (पीआईबी): प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने गुरुवार, 31 जुलाई को रेल मंत्रालय की चार परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है, जिनकी कुल अनुमानित लागत लगभग ₹11,169 करोड़ है। इन परियोजनाओं में शामिल हैं:
- इटारसी-नागपुर चौथी लाइन
- छत्रपति संभाजीनगर-परभणी दोहरीकरण
- अलुआबाड़ी रोड-न्यू जलपाईगुड़ी तीसरी-चौथी लाइन
- डांगोआपोसी-जरोली तीसरी-चौथी लाइन
बढ़ी हुई लाइन क्षमता से भारतीय रेल की गतिशीलता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय रेल की परिचालन क्षमता और सेवा विश्वसनीयता में सुधार होगा। ये मल्टी-ट्रैकिंग प्रस्ताव परिचालन को सुव्यवस्थित करने और भीड़ को कम करने के लिए तैयार की गई हैं।
ये परियोजनाएँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नए भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप हैं, जो क्षेत्र के लोगों को व्यापक विकास के माध्यम से “आत्मनिर्भर” बनाएंगी और उनके रोजगार/स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ाएंगी।
ये परियोजनाएँ पीएम-गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत बनाई गई हैं, जिनका उद्देश्य एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श के माध्यम से मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता को बढ़ाना है। ये परियोजनाएँ लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही के लिए निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करेंगी।
महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा और झारखंड राज्यों के 13 जिलों को कवर करने वाली ये 4 परियोजनाएँ भारतीय रेल के वर्तमान नेटवर्क को लगभग 574 किलोमीटर तक बढ़ा देंगी।
प्रस्तावित मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाएँ लगभग 2,309 गाँवों तक कनेक्टिविटी बढ़ाएंगी, जिनकी आबादी लगभग 43.60 लाख है।
ये कोयला, सीमेंट, क्लिंकर, जिप्सम, फ्लाई ऐश, कंटेनर, कृषि उत्पाद और पेट्रोलियम उत्पादों आदि जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए आवश्यक मार्ग हैं। क्षमता वृद्धि कार्यों के परिणामस्वरूप 95.91 MTPA (मिलियन टन प्रति वर्ष) का अतिरिक्त माल यातायात होगा।
रेलवे, पर्यावरण अनुकूल और ऊर्जा कुशल परिवहन माध्यम होने के कारण, जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और देश की रसद लागत को कम करने, तेल आयात (16 करोड़ लीटर) कम करने और CO2 उत्सर्जन (515 करोड़ किलोग्राम) कम करने में मदद करेगा, जो 20 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है।
दक्षिण पूर्व रेलवे की डांगोआपोसी-जरोली तीसरी और चौथी लाइन परियोजना
इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत ₹1,752 करोड़ है। यह परियोजना उड़ीसा के क्योंझर जिले और झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में स्थित लौह अयस्क क्षेत्र तथा इस्पात उत्पादन इकाईयों को जोड़ती है। परियोजना के पूरा होने पर यह भारत के 300 मिलियन टन वार्षिक इस्पात उत्पादन लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
परियोजना का विवरण:
- मार्ग लंबाई: 43 किमी
- ट्रैक लंबाई: 108 किमी
- 7 स्टेशन
- 10 बड़े पुल
- 196 छोटे पुल
- 8 आरओबी (रेल ओवर ब्रिज)
- 4 आरयूबी (रेल अंडर ब्रिज)
- 2 रेल ओवर रेल ब्रिज
- 3.85 करोड़ लीटर डीजल की बचत
- 50 मिलियन टन माल की ढुलाई की सुविधा
- ₹6,038 करोड़ की लॉजिस्टिक लागत में बचत
- 170 करोड़ किग्रा CO₂ की बचत (जो लगभग 11 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है)

