ECR: ‘तीज’ के नाम पर प्रशासनिक तांडव और अवैध वसूली का खेल

रेलवे के सरकारी संसाधनों, सुविधाओं और वित्तीय बल पर संपोषित तथा संरक्षित रेलवे महिला कल्याण संगठन (#WWO) का मूल स्वरूप अब कर्मचारियों और ठेकेदारों के शोषण का केंद्र बन चुका है। इन संगठनों की मुख्य भूमिका अब केवल उच्चाधिकारियों (जीएम और डीआरएम) की पत्नियों को ‘डी-फैक्टो’ (अनधिकृत) जीएम और डीआरएम के रूप में स्थापित करने तक सीमित होकर रह गई है। ये समितियां रेलवे के तमाम प्रशासनिक, नीतिगत और गैर-सरकारी कार्यों में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप करती हैं, जबकि प्रशासनिक पदों पर बैठे अधिकारी मूकदर्शक (जनखे) बनकर इस पूरे तंत्र को तमाशा बनते देख रहे हैं।

July 27, 2026: “रेलवे में “तीज” के नाम पर संस्थागत कदाचार और प्रशासनिक एवं वित्तीय अनियमतताओं का संकट

अब इन महिला संगठनों को एक नया ‘दायित्व’ मिल गया है—तीज और अन्य सांस्कृतिक आयोजनों के बहाने उच्चाधिकारियों का विदाई समारोह (फेयरवेल) आयोजित करना और इसकी आड़ में संगठित रूप से अवैध वसूली को अंजाम देना। पूर्व रेलवे के ढ़र्रे पर चलते हुए अब पूर्व मध्य रेलवे (#ECR) के मुख्यालय और मंडल स्तर के महिला संगठनों ने तीज को धन उगाही का प्रमुख जरिया बना लिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, विभिन्न मंडलों में इसके बहाने लाखों रुपये की जबरन वसूली की जा रही है।

उल्लेखनीय है कि पूर्व मध्य रेलवे के वर्तमान जीएम का इसी माह सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) है। अंतिम दिनों में मंडलों के दौरों के नाम पर वसूली का जो खाका खींचा गया है, उसमें मंडलों के महिला संगठन पहले से ही सक्रिय हो चुके हैं। जीएम के इन औपचारिक ‘निरीक्षण सह विदाई दौरों’ के लिए लगभग सभी मंडलों के स्लॉट तय कर दिए गए हैं।

निजी स्वार्थों और अधिकारियों की खातिरदारी के लिए पर्व-त्यौहारों की तिथियों और सांस्कृतिक मर्यादाओं को भी ताक पर रख दिया गया है। इस वर्ष हरियाली तीज 14 अगस्त को और हरितालिका तीज 14 सितंबर को है, लेकिन धनबाद मंडल में इसे 12 अगस्त को ही आयोजित किया जा रहा है, जबकि समस्तीपुर में यह आयोजन 19 अगस्त को तय किया गया है। प्रशासनिक चाटुकारिता और मजे के लिए इन संगठनों ने पर्व के समय और मुहूर्त को अपनी सुविधानुसार पूरी तरह बदल दिया है। यह स्पष्ट दर्शाता है कि महिला संगठन अब केवल संस्थागत शोषण और वसूली का जरिया बनकर रह गए हैं।

#Ep234: #WWO = Contributory Corruption Organisation (#CCO) of Indian Railways!

धनबाद, समस्तीपुर और दानापुर मंडलों में वसूली का लक्ष्य लगभग पूरा किया जा चुका है। ‘निरीक्षण’ के नाम पर विशेष सैलून (Special Inspection Car) के माध्यम से जीएम और विभाग प्रमुखों (PHODs) का अमला मंडलों का दौरा करेगा, जहाँ जीएम और उनकी पत्नी अपने-अपने ‘नजराने’ स्वीकार करेंगे। डीआरएम्स पत्नियां (छोटी बी) जीएम पत्नी (बड़ी बी) को महंगे उपहार और नजराने सौंपेंगी, और इसकी व्यवस्था करोड़ों की एफडी के व्याज और मातहतों तथा ठेकेदारों से वसूले गए पैसों से की जाएगी।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों और मुजरे के नाम पर मंडल की महिला समितियां पूर्व के कई विवादित आयोजनों के रिकॉर्ड तोड़ने की होड़ में हैं। अधिकारियों की पत्नियां ‘सांस्कृतिक प्रस्तुति’ के नाम पर प्रशासनिक गरिमा को ताक पर रखकर जीएम और अन्य उच्चाधिकारियों को रिझाने के लिए ऐसे प्रदर्शनों में शामिल हो रही हैं, जिनका संचालन स्वयं डीआरएम की पत्नियां कर रही हैं।

इसी माह सेवानिवृत्त हो रहे जीएम और उनकी पत्नी सरकारी खर्च पर ‘शहंशाह’ की भांति मंडलों का दौरा करने की तैयारी में हैं। विभाग प्रमुख (PHOD) और उनकी पत्नियां विशेष कैरेज का उपयोग कर इन आयोजनों का हिस्सा बनेंगी। मातहत कर्मचारियों और तंत्र की पूरी फौज इनकी आवभगत में झोंक दी गई है। यह पूरी प्रक्रिया भारत सरकार के सेवा नियमों, वित्तीय नियमावली और प्रशासनिक आचार संहिता का खुला उल्लंघन है। यह सारा तमाशा केवल पद के दुरुपयोग और अपना हिस्सा वसूलने के लिए किया जा रहा है, जिसमें भारी मात्रा में सरकारी राजस्व, मैनपावर और मैन-अवर्स की बर्बादी हो रही है। इस प्रक्रिया में प्रशासनिक नैतिकता, शुचिता और व्यवस्थागत शिष्टाचार को पूरी तरह तिलांजलि दे दी गई है।

अवैध अस्तित्व, गैर-संवैधानिक ढ़ांचा और भ्रष्टाचार का गढ़

यहाँ सबसे बड़ा प्रश्न इन तथाकथित महिला कल्याण संगठनों के वैधानिक अस्तित्व और औचित्य पर उठता है। रेलवे बोर्ड के नियमों और भारतीय संविधान के तहत यह स्पष्ट है कि किसी भी गैर-सरकारी समिति या संगठन को रेलवे के प्रशासनिक मामलों, निविदा प्रक्रियाओं, या वित्तीय निर्णयों में हस्तक्षेप करने का कोई कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं है। इसके बावजूद, ये समितियां बिना किसी जवाबदेही के एक समानांतर प्रशासनिक व्यवस्था चला रही हैं।

रेलवे में पनप रहे व्यापक भ्रष्टाचार के पीछे इन अवैध संगठनों की भूमिका सबसे अधिक संदिग्ध है। ठेकेदारों, आपूर्तिकर्ताओं और वेंडरों को टेंडर प्रक्रिया में लाभ पहुंचाने, बिलों के भुगतान को हरी झंडी देने और अनुकूल पोस्टिंग-ट्रांसफर के बदले इन्हीं महिला संगठनों के माध्यम से ‘उपहार’ और ‘चंदे’ के रूप में रिश्वत (अवैध वसूली) को सफेद किया जाता है। ठेकेदार भी अपने व्यावसायिक हितों को साधने के लिए इन संगठनों द्वारा आयोजित तीज, दिवाली और नववर्ष जैसे कार्यक्रमों में खुलकर फंडिंग करते हैं। वास्तव में, यह तंत्र रेलवे के भीतर सीधी रिश्वतखोरी का एक सुरक्षित और गैर-आडिटेड रास्ता बन चुका है।

सार्वजनिक धन की खुली लूट और सरकार से हस्तक्षेप की मांग

विभिन्न मंडलों में इस बात की प्रतिस्पर्धा चल रही है कि कौन सबसे कीमती नजराना पेश करता है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, इन आयोजनों के निमंत्रण पत्र तक सोने-चांदी के आभूषणों और महंगे कपड़ों के साथ भेजे जा रहे हैं। जीएम के दौरों के दौरान इंस्पेक्शन कार, लाइट गुड्स मूवमेंट और विशेष कोच के परिचालन पर पारदर्शी और स्वतंत्र जांच की सख्त आवश्यकता है, ताकि सार्वजनिक धन की इस खुली लूट को रोका जा सके।

सेवानिवृत्ति के अंतिम पड़ाव पर खड़े जीएम द्वारा व्यापक सेक्शन या स्टेशन निरीक्षण करने का कोई तार्किक औचित्य नहीं रह जाता। उनका अंतिम समय प्रशासनिक कार्यों को निष्पादित करने में बीतना चाहिए, न कि मंडलों में घूम-घूमकर विदाई के नाम पर उपहार बटोरने में। यहाँ तक कि यह चर्चा भी गर्म है कि जीएम साहब अपने नवनिर्मित निजी आवास के लिए साजो-सामान और कीमती इंटीरियर आइटम्स भी ठेकेदारों के सहयोग से इसी तीज आयोजन और विदाई वसूली के नाम पर जुटा रहे हैं।

माननीय रेलमंत्री जी और प्रधानमंत्री जी, यह अत्यंत आवश्यक है कि आप वरिष्ठ अधिकारियों की नियमित प्रशासनिक रिपोर्टों से इतर इन अवैध और गैर-संवैधानिक गतिविधियों पर कड़ा संज्ञान लें—

  1. थर्ड पार्टी और CAG ऑडिट: रेलवे के इन महिला संगठनों की तमाम संपत्तियों, बैंक खातों, आय-व्यय और प्रायोजकों (Sponsors) का कैग (CAG) या किसी स्वतंत्र थर्ड-पार्टी एजेंसी से फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाना अनिवार्य किया जाए।
  2. समानांतर हस्तक्षेप पर रोक: रेलवे परिसरों, सैलूनों और सरकारी संसाधनों के उपयोग पर इन संगठनों के लिए पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
  3. कड़ी दंडात्मक कार्रवाई: सरकारी पैसों, सुविधाओं और पद का दुरुपयोग करने वाले ऐसे अधिकारियों और उनसे जुड़े संगठनों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उदाहरण पेश किया जाए।

सार्वजनिक संपत्ति की इस खुली लूट और प्रशासनिक तंत्र के नैतिक पतन पर तत्काल अंकुश लगाना रेल हित और राष्ट्र हित में अत्यंत आवश्यक है। क्रमशः—उत्तर रेलवे में तीज के नाम पर हो रही अवैध वसूली—जहां #PCSTE की पत्नी ने बतौर सेक्रेटरी—तांडव मचा रखा है!