रेलवे की नई आर्बिट्रेशन पॉलिसी में एक और सुधार की मांग: “निगेटिव नेट वर्थ” और सरकारी दावों पर स्पष्ट नियम बनाने की आवश्यकता

रेल मंत्रालय द्वारा मध्यस्थता (Arbitration) से संबंधित पात्रता मानदंडों में किए जा रहे सुधारों का उद्योग जगत ने स्वागत किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आर्बिट्रेशन वैल्यू (Arbitration Value) को नेट वर्थ (Net Worth) से जोड़ा जा रहा है, तो इसके साथ कुछ स्पष्ट कानूनी दिशानिर्देश भी जारी किए जाने चाहिए, जिससे देश भर के सभी रेलवे जोन एक समान नीति अपनाएँ।

विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय अनुबंध प्रणालियों, विशेषकर #FIDIC के मूल सिद्धांत, यह स्वीकार करते हैं कि केवल किसी एक पक्ष द्वारा दावा (#Claim) प्रस्तुत कर देना, उस दावे की सत्यता या देयता का अंतिम प्रमाण नहीं होता। दावा तभी अंतिम दायित्व बनता है जब उसका निस्तारण मध्यस्थता, न्यायालय अथवा सक्षम प्राधिकारी द्वारा हो।

इसी आधार पर सुझाव दिया गया है कि रेलवे स्पष्ट रूप से यह प्रावधान करे—

  1. यदि रेलवे/सरकार के दावे किसी ठेकेदार की नेट वर्थ से अधिक होकर उसे निगेटिव नेट वर्थ की स्थिति में पहुँचा दें, तो ऐसे ठेकेदार को नए टेंडरों के लिए अपात्र घोषित किया जा सकता है।
  2. परंतु यदि केवल ठेकेदार द्वारा रेलवे/सरकार के विरुद्ध दावे लंबित हों और रेलवे/सरकार का ठेकेदार के विरुद्ध कोई दावा न हो, तो ऐसे ठेकेदार को रेस्पॉन्सिव बिडर माना जाना चाहिए। केवल लंबित दावों के आधार पर उसे अपात्र घोषित करना न्यायसंगत नहीं होगा।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह दृष्टिकोण भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 की धारा 37 (अनुबंध के पालन का दायित्व), धारा 54 (एक पक्ष की चूक का प्रभाव) तथा धारा 73 (अनुबंध भंग होने पर क्षतिपूर्ति) की मूल भावना के अनुरूप है, क्योंकि अनुबंधीय अधिकारों और दायित्वों का अंतिम निर्धारण विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया से होना चाहिए।

साथ ही, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने विभिन्न निर्णयों में यह सिद्धांत दोहराया है कि सरकारी निविदाओं में पात्रता की शर्तें पारदर्शी, तर्कसंगत, गैर-मनमानी तथा समान अवसर (Level Playing Field) सुनिश्चित करने वाली होनी चाहिए। न्यायालय ने यह भी माना है कि अनुबंध संबंधी मामलों में न्यायसंगत निर्णय, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों तथा निष्पक्ष प्रशासन का पालन आवश्यक है।

विशेषज्ञों का मत है कि यदि रेलवे बोर्ड इस विषय पर एक विस्तृत स्पष्टीकरण जारी करता है, तो देशभर में निविदा मूल्यांकन की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी, अनावश्यक विवाद कम होंगे और रेलवे की खरीद प्रणाली अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं तथा FIDIC सिद्धांतों के और निकट पहुँचेगी।