रेल की खराब मोबिलिटी और गलत प्लानिंग के लिए सीधे जवाबदेह और जिम्मेदार है ऑपरेटिंग विभाग
मध्य रेल के ऑपरेटिंग विभाग की अराजकता के बारे में पहले भी कई बार लिखा जा चुका है। ट्रैफिक प्लानिंग में कमजोर यह विभाग समझता है कि चिल्लाने और डराने-धमकाने से ही गाड़ी चलती है। लोको पायलट/सहायक लोको पायलट (LP/ALP) की ड्यूटी रूटीन में 14 घंटों से अधिक हो रही है, हालाँकि ऐसा ही कुछ हाल अन्य जोनल रेलों में भी दिखाई दे रहा है।
तथापि मध्य रेलवे के भुसावल-नागपुर-पुणे-सोलापुर मंडलों से CLI/TI के इनपुट भयावह स्थिति सामने ला रहे हैं। खबर है कि मध्य रेल के इन मंडलों में वैगन होल्डिंग बेंचमार्क से 30 से 40% बढ़ी हुई है। इसके कारण सेफ्टी मेंटेनेंस और अंडरपास के काम बहुत अधिक प्रभावित हो रहे हैं। जहाँ एक ओर फेंसिंग का काम जोर पकड़े है, वहाँ LHS के काम का स्थानीय दबाव बहुत अधिक है, क्योंकि किसानों और गांवों के बीच अब फेंसिंग आ गई है।
ऐसा लगता है #PCOM/CR हेडक्वार्टर में बैठकर केवल सींग लड़ाते रहते हैं, बाकी #PHODs से बात नहीं करते। उनके अधकचरे #CFTM को केवल धौंसबाजी ही आती है। पिछले दिनों एक कंट्रोलर की हृदयाघात से हुई मौत इसी बात का दुष्परिणाम बताया गया था। उनका बचकाना #DOM/भुसावल न केवल गार्ड को अनावश्यक चार्जशीट देकर मनमानी कर रहा है, बल्कि कुछ लेडीज स्टाफ के साथ उसके लबाड़ीपन की भी खबरें आई हैं।
ट्रैफिक कैडर की ये बहुत बड़ी समस्या है, इनका असेट तो कुछ भी नहीं है, न ही उसकी सेफ्टी के प्रति इनकी कोई जवाबदेही है, लेकिन इनकी दबंगई भरपूर है। आज रेल की खराब मोबिलिटी के लिए जिम्मेदार और खराब एवं गलत प्लानिंग की सीधी जवाबदेही ऑपरेटिंग विभाग की है। अतः जब तक मंत्री जी इनसे सीधे नहीं पूछेंगे, तब तक ये न तो समझेंगे, और न ही सुधरेंगे। कल भुसावल मंडल में हुई यूनियन की नारेबाजी आने वाले तूफान का बड़ा संकेत है।
#CLI बताते हैं कि कैसे उनके लोको पायलट पर दबाव रहता है कि 12/14 घंटे रूटीन में गाड़ी चलाएँ। सामंजस्य के अभाव का सोर्स मुख्यालय में हैं, न कि डिवीजन में, क्योंकि हेडक्वार्टर के ऑपरेटिंग अधिकारी—कंट्रोल और मंडलों के काम में इतना अधिक हस्तक्षेप करते हैं कि कई बार यह लगता है कि ऑपरेटिंग ब्रांच के अधिकारियों की आवश्यकता केवल OT/TA साइन करने की ही है और उनका डिवीजन डिवीजन में कोई काम नहीं है।
सिस्टम में बढ़े हुए तनाव के प्रमुख कारक ट्रैफिक-ऑपरेटिंग की जमींदारों और लाटसाहबों वाली मानसिकता है। जब तक सिस्टम में ये मूलभूत कल्चरल बदलाव नहीं आएगा, तब तक रेल में मोदी जी कितना ही निवेश कर दें, मालगाड़ियाँ तो 15 किमी प्रति घंटे पर ही चलेंगी।
खबर है कि PCOM/CR को शीघ्र ही दिल्ली में उनकी मनचाही पोस्टिंग मिलने वाली है और यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि नेता प्रतिपक्ष (#LoP) वैसे ही रनिंग कैटेगरी को टारगेट कर चुके हैं—ऐसे में जैसी ट्रेन ऑपरेटिंग हो रही है—उससे लग रहा है कि शीघ्र मंत्री जी को पुनः शर्मिंदा होना पड़ेगा।

