रेलवे टेंडर्स में अनियमितता के आरोप: सिंगल लिमिटेड/लिमिटेड टेंडर व्यवस्था पर लगे गंभीर प्रश्नचिह्न
रेलवे में जारी टेंडर प्रक्रिया को लेकर ठेकेदारों और संबंधित पक्षों द्वारा गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए जा रहे हैं। आरोप है कि पूर्व में किए गए कई सिंगल लिमिटेड टेंडर्स (#SLT) में बिल ऑफ क्वांटिटी (#BOQ) आइटम, शर्तें, पात्रता मानदंड (Eligibility Criteria) तथा शॉर्टलिस्ट किए गए ठेकेदारों के चयन में बड़े स्तर पर गड़बड़ी की गई।
बताया जा रहा है कि टेंडर के समय कार्य-अवधि सामान्यतः 4 से 6 महीने दर्शाई जाती है, लेकिन बाद में कुछ पसंदीदा/चहेते ठेकेदारों को डेट ऑफ कम्प्लीशन (#DOC) एक्सटेंशन के माध्यम से बिना किसी पेनल्टी के एक्सटेंशन ऑफ टाइम (#EOT) देकर रेलवे को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुँचाए जाने की आशंका है। इससे प्रतिस्पर्धी व्यवस्था और समयबद्ध निष्पादन—दोनों पर प्रश्नचिन्ह खड़े होते हैं।
सबसे गंभीर चिंता तकनीकी पात्रता मानदंड को लेकर व्यक्त की जा रही है। आरोप है कि “उपरोक्त टेंडर” में टेक्निकल एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया इस तरह बनाए/बदले गए कि प्रतिस्पर्धा सीमित हो जाए और लाभ कुछ चुनिंदा पक्षों तक सिमट जाए।
इसके साथ ही लिमिटेड टेंडर (एलटी) और सिंगल लिमिटेड टेंडर (SLT) प्रणाली को भ्रष्टाचार के “स्रोत” के रूप में भी देखा जा रहा है। आरोप है कि यह व्यवस्था भ्रष्ट ठेकेदारों और भ्रष्ट अधिकारियों के बीच “गठजोड़” या “कार्टेल” बनाने में सहायक बन रही है, जहां कमीशन/मार्जिन दरें ओपन टेंडर की तुलना में कई गुना तक अधिक होने की भी आशंका जताई जाती है।
जानकारों का मानना है कि यदि इन टेंडर्स की प्रदर्शन-आधारित जाँच नहीं की गई—जैसे समय-सीमा का पालन, बजट का सही उपयोग, ओपन टेंडर की बाजार दरों से तुलना, गुणवत्ता और मात्रा की वास्तविक जांच, तथा डिजाइन और निष्पादन की तकनीकी समीक्षा—तो सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और परियोजनाओं की गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा बना रहेगा।
अब मांग उठ रही है कि संबंधित टेंडरों की स्वतंत्र जांच, टेंडर शर्तों/BOQ/पात्रता मानदंड की ऑडिट, EOT/DOC Extension देने के कारणों की जांच, तथा जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों की जवाबदेही तय की जाए—ताकि पारदर्शिता बहाल हो और प्रतिस्पर्धी, निष्पक्ष तथा गुणवत्तापूर्ण टेंडर प्रक्रिया सुनिश्चित हो सके।
प्रश्न यह है कि CVC/CBI और रेलवे विजिलेंस जैसी एजेंसियों द्वारा समय पर जाँच क्यों नहीं की जाती?
आरोप है कि पहले भी उत्तर रेलवे सहित कई जोनल रेलवे में इसी प्रकार के कार्यों/टेंडरों में भारी अनियमितताएँ पाई गईं, परंतु समयबद्ध जाँच/कार्रवाई नहीं हुई।
यदि जाँच में देरी होती है, तो रिकॉर्ड/फाइलें प्रभावित होने, जिम्मेदारी तय न होने और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलने की आशंका रहती है। इसलिए जानकारों का मानना है कि संबंधित टेंडरों, BOQ, पात्रता मानदंड, शॉर्टलिस्टिंग, EOT/DOC एक्सटेंशन, भुगतान एवं गुणवत्ता की स्वतंत्र, समयबद्ध और पारदर्शी जाँच कराकर दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

