शोक मनाने का समय नहीं, रेलकर्मियों ने जीएम विजय कुमार के अंतिम संस्कार से पहले मीटिंग की जल्दबाजी पर सवाल उठाया!

#PunekarNews की इस खबर, No time to mourn, railway staff question urgency of meeting held before GM Vijay Kumar’s last rites की वेरिफिकेशन में पाया गया कि यह खबर अक्षरशः सही है। #GMCR विजय कुमार के असामयिक निधन से मध्य रेल के सभी अधिकारी बहुत स्तब्ध और दुखी थे कि जिस व्यक्ति से कल रात बात हुई—जिसने सिक्योरिटी के बारे में विस्तृत निर्देश दिए थे—वह सुबह नहीं जागा—यह उनके लिए कल्पनातीत था।

रेलवे बोर्ड के आदेशानुसार जीएम/म.रे. के पद का अतिरिक्त कार्यभार सँभालने वाले पश्चिम रेलवे के जीएम विवेक गुप्ता—जैसा सुना गया था, और जैसा हमें भी पहले से ज्ञात था—बहुत अपरिपक्व, बहुत उथले और बहुत छिछले साबित हुए। उनमें यह गरिमा और गहराई नहीं थी कि कम से कम दिवंगत जीएम/म.रे. विजय कुमार के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार होने तक की ही प्रतीक्षा कर लेते।

मध्य रेल को एक रेगुलर जीएम शीघ्र ही चाहिए, नहीं तो स्थिति और अधिक खराब ही होगी, ऐसा मध्य रेल के लगभग सभी अधिकारियों का मानना है।

वहीं कल मंगलवार को हुए रिव्यू का संज्ञान रेल भवन को लेना चाहिए। रेल को ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता नहीं, जिसमें इतनी संवेदना भी नहीं। मात्र औपचारिक परिचय के लिए बुलाई गई वीसी को रेगुलर वीसी में बदलकर विवेक गुप्ता ने पूरी रिव्यू मीटिंग ही कर डाली। उनके हावभाव और बर्ताव से वीसी में बैठे मध्य रेल के किसी भी अधिकारी को ऐसा आभास नहीं मिला कि वातावरण शोकग्रस्त है और अभी दिवंगत विजय कुमार का अंतिम संस्कार होना बाकी है। मध्य रेल के सभी मंडल विजय कुमार के असामयिक निधन से स्तब्ध हैं—ऐसे में विवेक गुप्ता के इस संवेदनहीन रिव्यू और अपरिपक्व व्यवहार ने उन्हें बहुत निराश किया है।

यह भी पता चला कि जहाँ दिल्ली ब्लास्ट की पृष्ठभूमि में देश में सुरक्षा को लेकर इतनी चिंता है—केंद्र और सभी राज्य सरकारें अलर्ट मॉड में हैं—वहीं विवेक गुप्ता ने वीसी में केवल वर्क्स और प्रोजेक्ट्स की बात की, जो उनका सबसे प्रिय विषय है, सेक्शन में सुरक्षा को लेकर केवल बोर्ड की चिट्ठी का जिक्र मात्र किया और बाकी सारे समय केवल वर्क्स की ही बात करते रहे और निर्देश दिया कि ब्रांच ऑफिसर जब भी फील्ड पर जाएं तो एक तरफ की यात्रा रेल से करें। इससे भी युवा अधिकारी निस्तब्ध दिखे। उनका यह मानना था कि मात्र कुछ मिनटों में कैसे यह आंकलन हो गया कि अधिकारी मौज-मस्ती कर रहे हैं, और फुटप्लेट नहीं कर रहे? इसी निर्देश ने सभी अधिकारियों को उद्वेलित कर दिया है।

संरक्षा और सुरक्षा के लिए अधीनस्थों की भावनाओं का निरादर और अविश्वास बहुत दुखद है। माननीय प्रधानमंत्री और रेलमंत्री इसका तुरंत संज्ञान लें।