सेंट्रल रेलवे स्कूल कल्याण की हेड मिस्ट्रेस ने डीआरएम के निरीक्षण नोट को फैब्रिकेट किया?

रेलवे स्कूल कल्याण की बरबादी के लिए समान रूप से जिम्मेदार हैं—हेड मिस्ट्रेस और सीनियर डीपीओ

#डीआरएम/मुंबई मंडल, मध्य रेलवे का मूल निरीक्षण नोट—जो कि सीनियर डीपीओ द्वारा तैयार किया गया था—को कथित रूप से जालसाजी करके सेंट्रल रेलवे स्कूल, कल्याण की #प्रधानाध्यापिका द्वारा पुनः फैब्रिकेट करके मनमाने तरीके से बनाया गया है और उस पर हस्ताक्षर करने के लिए टीचर्स को मजबूर किया गया।

सेंट्रल रेलवे स्कूल, कल्याण की हेड मिस्ट्रेस द्वारा कथित रूप से फैब्रिकेट किया गया डीआरएम का निरीक्षण नोट!

प्रश्न यह है कि रेल प्रशासन यह #जालसाजी करने वाली #प्रिंसिपल को कब तक पद पर बनाए रखेगा? इसके अलावा जो संबंधित अधिकारी इसके लिए उत्तरदायी हैं, वह मैसेज का रिप्लाई करने का भी कष्ट नहीं करते हैं!

जानकारों का कहना है कि #DRM के मूल #निरीक्षण नोट को #हेडमिस्ट्रेस द्वारा फोर्ज और फैब्रिकेट करके उसे स्कूल के टीचर्स एवं कर्मचारियों के बीच प्रसारित करना—यह एक गंभीर प्रकार का दुष्टतापूर्ण अपराध है। हेड मिस्ट्रेस ने इस कथित जालसाजी से अपनी बची-खुची विश्वसनीयता भी खो दी है। उनका मानना है कि इस कृत्य के लिए उन्हें तुरंत निलंबित किया जाना चाहिए और उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई के लिए अब तक के उनके सभी कृत्यों की गहन जांच करने की आवश्यकता है।

उल्लेखनीय है कि 23 अगस्त को डीआरएम ने रेलवे स्कूल, कल्याण का निरीक्षण किया था और वहां पसरी अव्यवस्था के प्रति कड़ी नाराजगी जताई थी। जबकि बताते हैं कि हेड मिस्ट्रेस के अनुचित और अनुपयुक्त आचरण से त्रस्त कुछ स्टूडेंट्स ने निरीक्षण के दौरान डीआरएम से कहा था कि “जब सरकारें बदली जा सकती हैं, तो हेड मिस्ट्रेस को क्यों नहीं बदला जा सकता!”

नाम उजागर न करने की शर्त पर कुछ टीचर्स का कहना है कि हेड मिस्ट्रेस द्वारा इंस्पेक्शन नोट में की गई यह हेराफेरी अपनी नालायकी और अक्षमता का ठीकरा कुछ टीचर्स पर फोड़ने का कुत्सित प्रयास है। लाखों रुपये खर्च करके लगाया गया स्कूल का सारा CCTV सिस्टम बरबाद हो चुका है। नलों के सेंसर काम नहीं करते, शौचालय साफ नहीं हो रहे हैं, स्कूल में चौतरफा गंदगी और अव्यवस्था का वातावरण है। इस सबको देखकर ही डीआरएम ने नाराजगी व्यक्त की थी।

टीचर्स की मांग है कि हेड मिस्ट्रेस के सेलेक्शन की भी जांच होनी चाहिए—क्योंकि उनका यह सेलेक्शन एक पूर्व लबाड़ी #PCPO द्वारा बिरादरी फेवर के तहत आउट ऑफ टर्न किया गया था? चौंकाने वाली जानकारी देते हुए उन्होंने यह भी बताया कि, “यह भी जांच का विषय है कि इसका हसबैंड मुंबई मंडल में ही ठेकेदारी करता है, जिसका लाभ इसे पदोन्नति पाने में मिला?” उनके स्वर में हेड मिस्ट्रेस के प्रति सम्मान का भाव तो था ही नहीं, बल्कि कटु तल्खी अवश्य झलक रही थी।

ज्ञातव्य है कि यहां पूर्व के लगभग 1950 स्टूडेंट्स की संख्या घटकर अब करीब 1300 से कम पर आ गई है। जिस स्कूल या शिक्षा संस्थान का मुखिया अपने मातहत टीचर्स एवं स्टूडेंट्स का विश्वास खो देता है उसको समाप्त होने में अधिक समय नहीं लगता। वर्तमान हेड मिस्ट्रेस के पदभार सँभालने से पहले इस स्कूल में गैर-रेलवे बच्चों के एडमिशन की वेटिंग लिस्ट 600 से अधिक होती थी, वहीं अब रेलकर्मी ही यहां से अपने बच्चों को निकालकर स्थानीय निजी स्कूलों में भेज रहे हैं। जबकि बताते हैं कि हेड मिस्ट्रेस के दुर्व्यवहार से तंग आकर कई टीचर स्कूल छोड़कर चले गए हैं।

टीचर्स का कहना है—“रेल प्रशासन यदि स्कूल को बचाना चाहता है, तो हेड मिस्ट्रेस को हटाने के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं है!” उनका यह भी कहना है कि वर्तमान सीनियर डीपीओ—जो हर हफ्ते स्कूल में आकर केवल मौज करता रहा और अपने अशिक्षित टाइप मूढ़तापूर्ण व्यवहार से टीचर्स को नीचा दिखाता रहा—भी स्कूल की बरबादी के लिए समान रूप से जिम्मेदार है।

पता चला है कि डीआरएम के निरीक्षण नोट को हेड मिस्ट्रेस द्वारा फोर्ज और फैब्रिकेट किए जाने की जानकारी सीनियर डीपीओ को पहले ही थी, तथापि उन्होंने इस पर न तो कोई उचित कार्रवाई की, और न ही इस मामले से डीआरएम को अवगत कराना आवश्यक समझा। क्रमशः