उच्च पद यदि रोटेशन और हाउस रिटेंशन में नैतिकता के मापदंडों पर छोटे पाए जाते हैं, तो रेल की भविष्य में कोई उम्मीद नहीं बचती!

बड़े महानगरों में बड़े और आलीशान बंगले रोककर रखना केवल भ्रष्टाचार ही नहीं, एक बहुत बड़ा प्रशासनिक व्यभिचार भी है!

18 जुलाई को कैट की समस्या सुलझते ही 8 दिन की देरी से गुरुवार, 24 जुलाई को 32 मंडल रेल प्रबंधकों (#DRM) की पोस्टिंग हो गई।

हालाँकि इनमें कुछ #पैराशूटर्स भी हैं—इनसे रेल नहीं चल पाएगी—अतः इनके बारे में रेलवे बोर्ड को कुछ पुख्ता सोचना पड़ेगा।

रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव और सीआरबी महोदय को ये ध्यान रखना होगा कि निवर्तमान डीआरएम्स की पोस्टिंग रोटेशन पर हो।

रेल के लगभग 100 उच्च पद—मेंबर, जीएम, डीआरएम—यदि रोटेशन और हाउस रिटेंशन में नैतिकता के मापदंडों पर छोटे पाए जाते हैं तो रेल की भविष्य में कोई उम्मीद नहीं बचती। वैसे भी जिनके आलीशान रेल आवास महानगरों में रिटेन होते हैं—डीआरएम से निवृत्त होने पर उनके पास वापस वहीं आने का मोटिवेशन भी होता है और इसका दबाव भी प्रशासन पर बनाया जाता है।

केंद्र सरकार की किसी अन्य ऑल इंडिया सर्विस में ऐसी लाटसाहबियत किसी को प्राप्त नहीं है। #डीआरएम तो दो साल के लिए होता है, लेकिन जीएम, मेंबर, चेयरमैन तो टर्मिनल पोस्टिंग होती है, ऐसे में बड़े महानगरों में बड़े और आलीशान बंगले रोककर रखना केवल भ्रष्टाचार ही नहीं, एक बहुत बड़ा प्रशासनिक व्यभिचार भी है।

जब यह सुविधा देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को नहीं है, तो रेल के इन 100 लाटसाहबों को क्यों होनी चाहिए? और तो और, इस पर पर्क्स वाला इनकम टैक्स भी नहीं लगता। प्रधानमंत्री कार्यालय रेल से परेशान है—केवल परेशान होने से कुछ नहीं होगा—#रोटेशन करने का कोई अल्टरनेटिव (विकल्प) नहीं है!

#हाउसरिटेंशन जैसी अनैतिक पालिसी और #रोटेशन का आभाव एक ऐसा इकोसिस्टम बना देता है, जिसमें कीमत केवल राजनैतिक नेतृत्व को ही चुकानी पड़ती है। वैसे भी, रेल की हालत देखने के लिए केवल इसकी एक यात्रा ही पर्याप्त है—‘वर्ल्डक्लास रेल’ का बहकावा बहुत हो चुका—लोग अब सब देख-समझ चुके हैं!