भारतीय रेल के इतिहास का सबसे बड़ा टीआरडी ब्रेकडाउन – क्या, क्यों, कैसे और आगे क्या?
जैसा कि रेल में होता है, स्पष्टता समय के साथ धूमिल होती जाती है।
लेकिन बात कुछ ऐसी है:
भुसावल मंडल में 19-20 जुलाई की रात को करीब सवा चार घंटे के अंतराल पर दो पैंटो इंटैंग्लमेंट की घटनाएँ हुईं। पहली घटना, कहा जाता है करीब सवा नौ बजे रात को एक मालगाड़ी के पैंटोग्राफ की ओएचई के साथ फँसने की हुई। बताया जा रहा है कि 161/08 किमी पर लोको पायलट को #OHE टूटी दिखाई दी और लोको के विंड शील्ड से ये टकरा गया। साथ ही पैंटो भी इसमें उलझ गया। सवा नौ बजे की इस घटना का रेस्टोरेशन रात 02.40 बजे हुआ। वैसे एक बात ये भी बताई जा रही है कि ब्लॉक एक बजे ही निरस्त हो गया था—सच क्या है, यह तो शायद कभी पता नहीं चल पाएगा।

तभी रात लगभग डेढ़ बजे के आसपास नासिक के पास डाउन लाइन पर एक यात्री गाड़ी का एक और पैंटोग्राफ़ इंटैंग्लमेंट हो गया! कुछ ही घंटों में यह दूसरा इंटैंग्लमेंट था। इससे बहुत सारी मेल/एक्सप्रेस गाड़ियां प्रभावित हो गईं। बताते हैं कि कुल मिलाकर लगभग 14-15 किमी ओएचई डैमेज हुआ। तथापि केवल दूसरी घटना का उल्लेख भुसावल मंडल के एक्स हैंडल पर है, पहली घटना का कोई उल्लेख नहीं है। बहरहाल, रियल-टाइम रिपोर्टिंग से जल-भुनकर भुसावल मंडल ने एक्स पर #Railwhispers को ब्लॉक कर दिया!
Repercussions:
17057-203”, 11012-130”, 11080”,12106-95”, 12110-60”,12138-103”, 12140-163”, 12141-313”, 12142-84”, 12152-135”, 12162-31”, 12167-472-“, 12168-150”, 12290-129”,12321-111”, 12322-479”, 12618-135”, 17058-131”, 17611-66”, 18030-45”, 22178-49”, 22222-14”, 11057-348”, 18029-452”, 12811-180”,
- Trains Cancelled-02
- Trains Diverted-08
- Trains rescheduled-04
How long did failure last
- UP/LINE-01:35/02:45HRS-70 MINS
- DN LINE 01:30/10:35HRS-810 MINS
खैर, दूसरा फेलियर पूरे नौ घंटे चला। दोनों इंटैंग्लमेंट कुल मिलाकर 880 मिनट चले, अर्थात् कुल ब्रेकडाउन करीब साढ़े चौदह घंटे का हुआ। इन दोनों घटनाओं ने देश के सबसे महत्वपूर्ण और अति-व्यस्त रेल मार्ग को पूरी तरह से बाधित कर दिया। यह अपने आप में ट्रैक्शन डिस्ट्रीब्यूशन (#TRD) के ब्रेकडाउन का एक राष्ट्रीय रिकॉर्ड बन गया।
क्यों है ये चिंताजनक?
पहले तो हजारों यात्रियों को परेशानी हुई, मिड-सेक्शन में बहुत सारी यात्री गाड़ियाँ अटक गईं। कई गाड़ियाँ निरस्त हुईं, कई डायवर्ट हुईं और कुछ रिशेड्यूल की गईं। बताते हैं कि आरपीएफ लगानी पड़ी, क्योंकि कई सौ यात्री डिब्बों से उतरकर ट्रैक पर आ गए थे। टीआरडी गैंग को घनी अंधेरी रात में और बारिश में पैदल चलकर जाना पड़ा।
मध्य रेल के भुसावल मंडल को 2027 में नासिक के अर्ध-कुंभ का भी आयोजन करना है। यदि उस समय इस तरह बारह घंटे से अधिक समय तक पूरा रेल मार्ग बाधित हो जाएगा, तो यह अंतरराष्ट्रीय घटना बन जाएगी।
मध्य रेल पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन पाने वाला पहला नेटवर्क है। रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन (#RE) से मध्य रेल का आरंभिक संबंध है। वहीं भुसावल मंडल में देश का सबसे बड़ा और उन्नत जोनल रेलवे ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (#ZRTI) है, और साथ ही इंडियन रेलवे इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग (#IRIEEN) नाम का बिजली के अधिकारियों का सेंट्रल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (#सीटीआई) भी है।
भुसावल मंडल का रेल विद्युतीकरण करीब तीस-चालीस साल पहले ही हो गया था। ऐसे में इस तरह से रेल नेटवर्क का बंद हो जाना रेल की बदहाली को ही बताता है कि कैसे रेल ऐसे तैराकों से भर गई है जिन्हें या तो तैरना नहीं आता या उन्हें पानी से डर लगता है!
क्या करना पड़ेगा
रेलवे के विद्युत विभाग के एक रिटायर्ड PHOD का कहना है कि OHE यदि ठीक से डिजाइन हो, ठीक से इरेक्ट हो जाए, और बाद में ठीक से उसका रखरखाव होता रहे, तो इसमें कोई फेलियर होने की संभावना बहुत कम होती है, मगर परेशानी ये है कि बिजली के अधिकारी बड़े पदों पर तो चले गए, लेकिन उनकी प्रोफेशनल इंटीग्रिटी कुछ नहीं थी। इन्होंने केवल अपने स्वार्थ को ही देखा और रेल विद्युतीकरण पर कोई ध्यान नहीं दिया—जैसा कि सिविल या सिग्नल इंजीनियरों ने किया—डिजाइन से लेकर उसके अनुरक्षण के मानकों पर ध्यान नहीं दिया गया।
उल्लेखनीय है कि OHE की भी नियमित पेट्रोलिंग होती है और इसके ओवरहॉल की अवधि भी तय है। लेकिन यदि विद्युत अधिकारी अपने मूलभूत काम से भटक जाते हैं तो कोई परिश्रम क्यों करे? TRD के बारे में ये मान लिया जाता है कि इसमें अनुरक्षण (मेंटेनेंस) करने को कुछ नहीं है। डीआरएम और महाप्रबंधकों के लिए ये प्राथमिकता नहीं है।
बताते हैं कि नीचे अधिकारियों को अपने हेडक्वार्टर से केवल डाँट ही मिलती है। सुबह-सुबह जब युवा अधिकारी अपने बच्चों को स्कूल भेज रहे होते हैं, घर परिवार के साथ नाश्ता कर रहे होते हैं, उस समय हेड क्वार्टर की कांफ्रेंस में उन्हें अपशब्दों से अपमानित किया जाता है—तो बचने के लिए झूठ बोलना उनकी विवशता बन गई है। यदि आज कोई जानना चाहे कि सच क्या है—तो किसी को नहीं पता—लेकिन फाइलों के पेट भरे हैं और सारे कागज दुरुस्त हैं। इंस्पेक्शन इसका हल नहीं है। सिस्टम में सच बोलने की आजादी देनी होगी सीनियर अधिकारियों को। झूठी पोजीशन देने का दबाव बनाना बंद करना पड़ेगा।
एक अन्य विभाग प्रमुख का कहना है कि अभी तो यह केवल आरंभ मात्र है, 2×25 केवी का बवाल जब अपने पूरे उफान पर आएगा, तब पता चलेगा कि पूरी भारतीय रेल घुटनों पर आ गई है।
जैसा कि रेल के एक चेयरमैन ने कहा था, “आज आवश्यकता बैक-टू-बेसिक्स की है—रेल की इंजीनियरिंग के साथ बहुत छेड़-छाड़ हो गई है। मध्य रेल का नेटवर्क 130 किमी प्रति घंटे का है। यदि इसका पूरा ध्यान नहीं रखा गया, तो ऐसे राष्ट्रीय कीर्तिमान बनते रहेंगे!”

