BLW—Fearless Game of Corruption in Modi ji’s Constituency
We’ve been receiving several Banaras Locomotive Works (#BLW) inputs, but it’s not possible to publish them in time due to the #verification process.
However, some of the inputs are time-sensitive and since they relate to hon’ble PM’s constituency—Varanasi, we are publishing some of the emails and diluting the direct references.
We hope that this would help #PED/Vigilance, Railway Board to investigate and set system correct.
#Ep173: #BLW—मोदी जी के संसदीय क्षेत्र में बेधड़क माफिया और खुला भ्रष्टाचार!
By email—BLW update-
BLW में अभी एक अधिकारी—एस. के. स्वतंत्र, IRSME—को डिजाइन ऑफिस से हटाया गया, इस पोस्ट पर पदस्थ हुए उन्हें मात्र 8 महीने ही हुए थे। इनके बारे में मैने पहले ही ईमेल में उल्लेख किया था। ये स्वतंत्र महाशय—महान प्रताप सिंह के कलेक्शन एजेंट—संतोषी अहीर—JE—के कन्ट्रोल में आ चुके थे। यह जेई—संतोषी अहीर—रात के 10-11 बजे तक इन स्वतंत्र महाशय के घर पर रहता था और सारी डीलिंग करता था।
सोचने वाली बात है कि दिनभर एक जेई—जो BLW का चर्चित कलेक्शन एजेंट है—महान प्रताप सिंह का वर्षों से दाहिना हाथ रहा है। अगर यह किसी अधिकारी के घर पर रहता है, तो क्या करता होगा? इसकी वहां क्या भूमिका होती होगी? यह समझने की बात है।
चर्चा यह है कि किसी वेंडर ने इस चर्चित कलेक्शन एजेंट की धनउगाही की कंप्लेंट सबूतों के साथ कर दी है, तभी इसका ट्रांसफर डिजाइन ऑफिस से बाहर किया गया है।
यह JE संतोषी अहीर—महाप्रबंधक के वर्तमान सेक्रेटरी के घर पर भी रहता है और उनके बहुत सारे व्यक्तिगत काम करता है। ये सेक्रेटरी महोदय इससे पहले डिप्टी सीईई/लोको हुआ करते थे।
चर्चा यह भी है कि कोलकाता के एक बड़े वेंडर के 7 शेल को मानकों के विपरीत पाया गया है, जिनको रिजेक्ट करने का प्रोसेस चल रहा है, उसकी भी डीलिंग लोको असेंबली शॉप (#LAS) के इस #JE संतोषी अहीर ने एस. के. स्वतंत्र (#IRSME) से कर ली थी और स्वतंत्र महाशय उसको डिजाइन ऑफिस से क्लियर करने को तैयार भी हो गए थे।
महान प्रताप सिंह के BLW से जाने के बाद यह जेई उर्फ कलेक्शन एजेंट इन्हीं दोनों अफसरों से अपनी नजदीकी दिखाकर वेंडरों से पैसा वसूलता है। पूरे BLW को यह जानकारी है, इसीलिए कोई वेंडर कुछ बोल नहीं पाता और न चाहते हुए भी धनउगाही का शिकार बनता है।
महान प्रताप सिंह का यहां एक और भी रैकेट चलता है—इसने एक डॉक्टर जय को जाति (भूमिहार) के नाम पर अपने गिरोह में शामिल कर लिया है, तो अपने खास लोगों को हॉस्पिटल में मदद या रेफर करने का भी खेला चल रहा है।
महान प्रताप लोगों से पैसा लेकर उन्हें डॉ जय के पास भेजता है रेफरल के लिए, डॉक्टर साहब अच्छे व्यक्ति हैं और बहुत अच्छे डॉक्टर भी हैं, लेकिन इस धूर्त के चक्कर में पड़ गए हैं, क्योंकि उनको पता ही नहीं कि उनके नाम पर वसूली हो रही है।
BLW UPDATES-by email
BLW में डायरेक्ट ऑफिसर्स भी अब प्रोमोटी हो गए हैं! कुछ नाम देखें-
- NEERAJ JAIN, CME/SE, 20 YEAR
- S B PATEL, CME, 15 YEAR
- PRAVEEN KUMAR, CDE, 12 YEAR
- SUNEEL KUMAR, 10 YEAR
- RAM JANAM CHAUBE (PROMOTEE) CSO, 10 YEAR
महान प्रताप सिंह, कमल कुमार सिंह, शोक कुमार और कुछ अन्य का कोढ़ BLW से खत्म होने के बाद अब उनके मित्र, कुम्भ कर्ण पटेल उनकी कमान सँभाले हुए हैं और अब अपने परम मित्र महान प्रताप की जगह भीतर ही भीतर माफिया गैंग की मदद कर रहे हैं। इनका भी प्रोफाइल महान प्रताप के जैसा ही है। इनको दो साल में रिटायर्ड होना है। ये 9 जनवरी को होने वाले स्टाफ काउंसिल के चुनाव करा रहे हैं। इन्होंने परसों शनिवार, 3 जनवरी को अपने चैंबर में चुनाव को लेकर एक बैठक भी की थी।
महान प्रताप और शोक कुमार के साथ ही कुम्भ कर्ण पटेल भी बहुत मंजे हुए खिलाड़ी रहे हैं, और साथ ही बनारस में तीनों ने बहुत बढ़िया और आलीशान बंगले बनवाए हैं। इनकी कमाई से अधिक संपत्ति मोदी सरकार के पिछले साढ़े ग्यारह सालों में न तो विजिलेंस को दिखाई दी है, और न ही स्थानीय पीएमओ कैम्प ऑफिस के कार्यकर्ताओं को दिखी है, मगर इनकी चर्चाएँ यहाँ लगातार होती रहती हैं।
BLW से रिटायर्ड हुए एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि “यहाँ असल में स्टाफ काउंसिल का चुनाव कर्मचारी नहीं लड़ता, बल्कि कुछ अधिकारियों के लगे-सगे प्यादे लड़ते हैं, जो बाद में उनके लिए वसूली करते हैं और साथ ही विरोधी अधिकारियों/कर्मचारियों के विरुद्ध फर्जी कम्प्लेंट्स करने का दायित्व निभाते हैं। यही कारण है कि शॉप्स में राउंड के बहाने ये अधिकारी—कर्मचारियों को सीधे धमकी के स्वर में बताते हैं कि उन्हें वोट किसको देना है!”
उनका कहना था कि BLW कुत्सित और भ्रष्ट राजनीति का वह रणक्षेत्र है, जहाँ साजिशों, षड्यंत्रों और भ्रष्टाचार के चक्र को जान लेने के बाद राज्य और केंद्र की राजनीति फीकी दिखाई पड़ेगी। संभवतः यही कारण है कि बनारस से तीन बार के माननीय सांसद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके स्थानीय कार्यकर्ताओं को अब तक यहाँ की राजनीति समझ में नहीं आई है! क्रमशः

