बहुत फलदाई रही रेलमंत्री की वीसी!

रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव जी की अध्यक्षता में शुक्रवार, 3 अप्रैल को हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) में सभी सहभागी रेल अधिकारी बहुत प्रेरित और प्रसन्न हुए। मंत्री जी का ये कहना कि डाँट-डपट से सिस्टम नहीं चलता—सिस्टमेटिक और स्ट्रक्चरल रिफार्म और इम्प्रूवमेंट होना चाहिए। उनका ये भी कहना कि काम और रिफार्म फील्ड से ही होंगे। इससे बहुत अच्छा संदेश गया है।

हालाँकि यहां मंत्री जी के संज्ञान में यह बात लानी आवश्यक है कि जोनल मुख्यालयों और रेल भवन में शतरंज के खेल #रोटेशन के साथ ही बंद होंगे। मंत्री जी ने ये भी कहा कि काम वही किए जाएं जिनकी वास्तव में आवश्यकता हो, केवल इसीलिए नहीं कि वह काम sanctioned हैं-मंत्री जी ने यह बात खासकर क्राउड कंट्रोल के लिए होल्डिंग एरिया के संदर्भ में कही। मंत्री जी की बात एकदम १०० प्रतिशत सही है।

मंत्री जी, आपको और मोदी जी को इस बात का तो साधुवाद देना बनता है कि पिछले बारह सालों में रेलवे को जितना आर्थिक समर्थन आपने दिया है वह 1853 से आज तक नहीं मिला। आप हिसाब लगाकर देख लें। तथापि मंत्री जी को यहां यह याद दिलाना आवश्यक है कि अपनी सलाहकार मंडली पर अवश्य ध्यान दें!

मंत्री जी, आपने बोर्ड विजिलेंस से त्रिमूर्ति का प्रभाव निश्चित ही कम किया है, लेकिन अभी बहुत काम बाकी है। ये सोचना आवश्यक है कि क्यों केंद्र सरकार का सबसे बड़ा आंतरिक विजिलेंस संगठन पूरी तरह से फेल है-वरना #CBI के इतने केस नहीं बनते। जो-जो पकड़े गए हैं—लगभग सभी नामी और शातिर हमेशा से थे, और यह सब जानते थे, फिर भी क्यों वे राडार पर नहीं आए। क्यों उन पर कार्यवाही नहीं हुई। इस पर विचार करने की नितांत आवश्यकता है।

मंत्री जी एक ड्राइव चलवाएँ और मोबिलिटी पर अधिक तथा कम फुटफॉल वाले स्टेशनों पर ज्यादा खर्च नहीं करने का निर्देश दें। भले ही प्रोजेक्ट सैंक्शन हैं, लेकिन यदि फुटफाल भविष्य में भी नहीं है, तो इतना अधिक खर्चने की जगह मोबिलिटी पर, यार्डों पर पैसा लगवाएँ। गाड़ियों की औसत गति अपने आप बढ़ जाएगी।

MEMU—जैसा कई GM ने कहा—वाकई इसकी बड़ी माँग है। इससे आप जमीनी स्तर पर जनता की बहुत मदद करेंगे। वहीं दक्षिण रेलवे के द्वारा दिए गए सुझाव तुरंत इंप्लीमेंट करवाइए। इसके साथ ही भारतीय रेल के सभी कंट्रोल रूम सबसे सौम्य और शांत चैंबर होने चाहिए, मच्छी बाजार की तरह वहां छीना-झपटी और लड़ाई-झगड़े नहीं होने चाहिए। ब्लॉक मांगने और देने के लिए जो सुझाव आए हैं, वह बहुत सारगर्भित और अनुभव से प्रेरित हैं। इन पर विशेष रूप से विचार किया जाए!

मंत्री जी की वीसी पर कई वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उनके नाम का उल्लेख न करते हुए उनकी बात मंत्री जी के समक्ष रखना उचित होगा। उनका कहना है कि मंत्री महोदय का GMs/DRMs के साथ VC के माध्यम से जोनों और मंडलों के एक्शन प्लान पर बात करना कहीं से भी बुरा नहीं है, बस शर्त ये है कि इसका इंपैक्ट ग्राउंड पर भी दिखना चाहिए। एक समय था जब मंत्री तो छोड़िए, यदि GM/DRM फील्ड में निरीक्षण के लिए निकलते थे तो उससे पहले नीचे का पूरा अमला ग्राउंड पर उतरकर एक-एक कमियों को देखकर मौके पर ही दूर करा देता था, ताकि निरीक्षण के दौरान कोई खामी न मिलने पाए और आज का दौर है जब जिम्मेदार लोग इस प्रकार के निरीक्षण को एक रूटीन की तरह ले रहे हैं और उन्हें जरा भी परवाह नहीं है कि यदि GMs/DRMs के निरीक्षण करते समय कोई कमी मिली तो क्या होगा!

उन्होंने कहा कि VC कल्चर खराब नहीं है, बशर्ते ये हो कि उसका इंपैक्ट ग्राउंड पर भी दिखे और जिन मुद्दों को लेकर कॉन्फ्रेंस होना है वो हकीकत में दिखें। अधिकारियों और कर्मचारियों के बेहतर लाइफ बैलेंस का भी ध्यान रखना जरूरी है। कोशिश हो कि अवकाश के समय वो भी घर परिवार और समाज से जुड़े रहें। लंबे समय से एक ही जगह पर काबिज लोगों को शिफ्ट करना बहुत ही जरूरी है जिससे संतुलन बना रहेगा और किसी भी प्रकार की अराजकता भी नहीं दिखेगी। हकीकत में हो ये रहा है कि चाहे जोनल/मंडल मुख्यालय हो, सारे सक्षम और अधिकार प्राप्त अधिकारी टेंडर फाइनल करने में व्यस्त दिख रहे हैं। अब ऐसे लोगों की प्राथमिकता है कि अपने टेन्योर में अधिक से अधिक हिसाब किताब बना लें, बाकी रेल व्यवस्था तो कोई न कोई देख ही रहा है। मुख्यालय के PHOD इस बात पर फोकस रख रहे हैं कि उनके मंडल में किसको किस पद पर रखा जाए, जिससे उनका हित सुरक्षित रहे, बाकी रेल का काम और उद्देश्य तो बाद में देखा जाएगा!