GST दरें घटने के बाद भी रेलवे का 12% भुगतान जारी—ठेकेदारों के बिलों से तुरंत रिकवरी की मांग

रेलवे के तमाम इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से जुड़े ठेकेदारों के बीच इन दिनों असंतोष स्पष्ट रूप से बढ़ता दिख रहा है। कारण है #GST दरों की आधिकारिक कमी के बावजूद रेलवे द्वारा भुगतान में कोई संशोधन नहीं किया गया है।

अर्थवर्क (#Earthwork) और बैलास्ट सप्लाई (#Ballast) पर GST दर 12% से घटाकर 5% की जा चुकी है—और यह संशोधित दरें पूर्ण रूप से लागू भी हैं। इसके बावजूद रेलवे अब भी पुराने 12% के आधार पर भुगतान कर रहा है, जिससे वित्तीय असंतुलन और नियमों के पालन पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं।

ठेकेदारों का कहना है कि जब GST दरें बढ़ी थीं, तब सभी कॉन्ट्रैक्टर्स ने एकजुट होकर रेल अधिकारियों को इसकी प्रतिपूर्ति करने की मांग की थी, और रेलवे ने उस समय अतिरिक्त GST की भरपाई भी की थी।
लेकिन अब दरें कम हो चुकी हैं, ऐसे में भुगतान को पुरानी दर पर जारी रखना न केवल अनुचित है, बल्कि यह वित्तीय पारदर्शिता के सिद्धांत के भी विपरीत है।

सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा यह उठ रहा है कि—

जब GST दरों में कटौती लागू हो चुकी है, तो इसके अनुसार भुगतान कम करने और पूर्व में किए गए 12% भुगतान की अतिरिक्त राशि की रिकवरी ठेकेदारों के बिलों से तुरंत की जानी चाहिए।

ठेकेदारों का कहना है कि पुनर्निधारित GST रेट के बाद भी 12% का भुगतान जारी रखना टैक्स नियमों के विरुद्ध है, और यदि रेल प्रशासन यह सुधार तुरंत लागू नहीं करता है, तो वह खुद वित्तीय अनियमितता की स्थिति पैदा करेगा।

यदि रेल प्रशासन समय रहते इस विसंगति को ठीक नहीं करता है, तो ठेकेदार इस मुद्दे को रेलवे बोर्ड, वित्त विभाग, और आवश्यक होने पर कानूनी मंचों तक ले जाने की तैयारी में हैं।

जानकारों का कहना है कि सरकारी नीति-नियमों का पालन केवल अधिसूचनाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए—वास्तविक कार्यान्वयन में भी दिखना चाहिए। आज यह जिम्मेदारी रेल प्रशासन पर और भी स्पष्ट रूप से है।