राष्ट्रपति की रेलयात्रा: रेलमंत्री सहित रेल अधिकारियों ने उड़ाई कोविड नियमों की धज्जियां, धरा रह गया कोविड प्रोटोकॉल!

रेलमंत्री पीयूष गोयल, चेयरमैन/सीईओ/रेलवे बोर्ड सुनीत शर्मा, जीएम/उ.रे., डीजी/आरपीएफ, डीआरएम/दिल्ली इत्यादि राष्ट्रपति का स्वागत करने पहुंचे थे सफदरजंग स्टेशन

रेलमंत्री के साथ रेल अधिकारी भी राष्ट्रपति के प्रशासनिक शिष्टाचार में भूल गए कानूनी शिष्टाचार, रेलमंत्री, चेयरमैन रेलवे बोर्ड सहित रेल अधिकारियों ने नहीं लगा रखा था मास्क, राष्ट्रपति और उनकी फेमिली को देखकर भी नहीं आया उनको इसका होश!
 
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद कानपुर जाने के लिए जब शुक्रवार, 25 जून को सफदरजंग रेलवे स्टेशन पहुंचे, तब वहां उनका स्वागत करने के लिए रेलमंत्री पीयूष गोयल और चेयरमैन रेलवे बोर्ड सुनीत शर्मा उपस्थित थे। इस अवसर पर उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक आशुतोष गंगल, डीआरएम/दिल्ली मंडल एस. सी. जैन और रेलवे बोर्ड एवं उत्तर रेलवे के सभी संबंधित वरिष्ठ अधिकारी भी स्टेशन पर मौजूद थे।

यह एक अत्यंत गरिमापूर्ण क्षण था, जब लगभग 15 साल बाद देश का प्रथम नागरिक भारतीय रेल में यात्रा कर रहा था। देशवासियों के लिए भी यह गर्व का पल था कि जनसामान्य के परिवहन माध्यम पर देश के प्रथम नागरिक ने यात्रा करके उसे अपने समान गरिमा प्रदान की है।

तथापि जहां एक तरफ हर सरकारी और गैर-सरकारी माध्यम पर लगातार कोरोना की तीसरी लहर आने की संभावना जताई जा रही है, और इससे बचाव के लिए केंद्र से लेकर सभी राज्य सरकारों द्वारा हर स्तर पर तैयारी की जा रही है। वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रपति को अपने गांव जाने के लिए विदा करने आए रेलमंत्री पीयूष गोयल से लेकर चेयरमैन/सीईओ/रेलवे बोर्ड सुनीत शर्मा सहित रेलवे बोर्ड, उत्तर रेलवे और दिल्ली मंडल के सभी छोटे-बड़े अधिकारी राष्ट्रपति के साथ फोटो खिंचवाने के लिए कोविड नियमों को ही भुला बैठे, जबकि वहीं राष्ट्रपति और उनकी फेमिली ने बकायदा मास्क लगाया हुआ था, यह देखकर भी रेलमंत्री सहित किसी भी रेल अधिकारी को इसका ध्यान नहीं आया।

धरी रह गई सोशल डिस्टेंसिंग

इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का भी खुलेआम उल्लघंन हुआ। अगर यही काम किसी सामान्य यात्री ने प्लेटफार्म पर किया होता, तो वहां बिना मास्क लगाए और सोशल डिस्टेंस का मखौल उड़ाते खड़े डीजी/आरपीएफ अरुण कुमार के आरपीएफ वाले मार-मारकर उसका भुर्ता बना देते, दो हजार रुपये का दंड लगाते और आपदा प्रबंधन एक्ट के तहत उसके विरुद्ध केस दर्ज करते, सो अलग।

रेलमंत्री का धन्यवाद ज्ञापन

इस अवसर पर रेलमंत्री पीयूष गोयल ने राष्ट्रपति को यात्रा के लिए रेलवे का उपयोग करने पर धन्यवाद दिया और आशा व्यक्त की कि कोरोना महामारी के पश्चात भारतीय रेल का विशाल नेटवर्क देश के आर्थिक गौरव को फिर से प्राप्त करने में सहायक होगा। रेलमंत्री ने इस अवसर पर राष्ट्रपति को महात्मा गांधी की रेलयात्रा का एक पोर्ट्रेट भी भेंट किया।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को महात्मा गांधी का पोर्ट्रेट भेंट करते रेलमंत्री पीयूष गोयल (बिना मास्क लगाए)

तत्पश्चात राष्‍ट्रपति की रेलयात्रा के लिए उत्तर रेलवे द्वारा विशेष रूप से तैयार की गई रेलगाड़ी पर सवार होकर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद दिल्‍ली के सफदरजंग रेलवे स्टेशन से अपने गांव परौंख, कानपुर, उत्तर प्रदेश के लिए रवाना हुए।

राष्ट्रपति का पदभार संभालने के बाद राष्ट्रपति श्री कोविंद का अपने गांव का यह पहला दौरा है। यहां ध्यान देने वाली बात यह भी है कि रेलवे द्वारा राष्ट्रपति की इस विशेष रेलगाड़ी को “प्रेसिडेंशियल सैलून” का नाम नहीं दिया गया है।

रेल मरी पड़ी है, तथापि चोंचलेबाजी करने का कोई अवसर नहीं चूकते हैं रेलमंत्री!

राष्ट्रपति की स्पेशल ट्रेन को पास करने के लिए वंदे भारत एक्सप्रेस को लेट किया गया। यह बात उक्त ट्रेन में यात्रा कर रहे एक वरिष्ठ पत्रकार ने उसी समय “रेल समाचार” को मैसेज भेजकर बताई।

उनका कहना था कि “माना कि राष्ट्रपति राष्ट्र प्रमुख हैं, पर क्या वह राष्ट्र और जनता से भी ऊपर हैं? यदि नहीं, तो जनता की ट्रेन को लेट क्यों किया गया? राष्ट्रपति की स्पेशल ट्रेन के लिए स्पेशल पाथ क्यों नहीं निकाला गया?”

अब उन्हें कैसे बताया/समझाया जाता कि यह तो फिर भी देश के प्रथम नागरिक राष्ट्रपति की विशेष ट्रेन थी, जो रेल में यात्रा करके न केवल रेल को, बल्कि सामान्य रेलयात्रियों और देश की समस्त जनता को गरिमा प्रदान कर रहे थे, यहां तो जीएम, डीआरएम से लेकर एक मामूली रेल अधिकारी भी बाकी ट्रेनों को रोककर/पीछे छोड़कर उस ट्रेन को आगे निकाल ले जाता है, जिसमें उसका आलीशान सैलून लगा हुआ होता है।

हां, यह बात सही है कि पिछले कुछ सालों में रेल को लेकर जितनी चोंचलेबाजी रेलमंत्री और रेल प्रशासन ने की है, उतनी पहले कभी देखने को नहीं मिली। पुख्ता काम तो कोई नहीं हुआ, और जो शुरू किया गया, वह सिरे तक नहीं पहुंचा। जबकि इस दौरान रेल मरणासन्न अवस्था में पहुंच गई। यह बात भी सही है कि जनता चुप जरूर है, मगर समय आने पर माफ नहीं करेगी। फिर वह चाहे सीधे चुनकर आने वाला हो, या फिर पीछे के दरवाजे से संसद में प्रवेश करने वाला हो!

बंद कर दी गई थी “राष्ट्रपति सैलून” की परम्परा

उल्लेखनीय है कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से उपयोग में लाए जा रहे “राष्‍ट्रपति सैलून” की सेवाओं को स्वयं राष्‍ट्रपति के निर्देश पर बंद कर दिया गया था। इससे इस सैलून के सालाना नवीनीकरण और रख-रखाव पर आने वाले करोड़ों रुपये के खर्च की बचत हुई थी।

रेलवे का मानना है कि राष्ट्रपति की इस यात्रा से उन रेलकर्मियों का मनोबल बढ़ेगा, जिन्‍होंने कोरोना महामारी के कठिन समय में पूरी निष्ठा, लगन और मेहनत से अपनी सेवाएं दी हैं। इससे लोगों को व्यापार, पर्यटन और अन्य उद्देश्‍यों के लिए देश के विभिन्न भागों में रेलगाड़ियों से यात्रा करने का प्रोत्‍साहन मिलेगा और साथ ही रेलयात्रा में उनका भरोसा भी बढ़ेगा।

वापसी में विमान से दिल्ली जाएंगे राष्ट्रपति

राष्‍ट्रपति को ले जाने वाली यह विशेष रेलगाड़ी कानपुर देहात के झींझक और रूरा रेलवे स्‍टेशनों पर ठहरी, जहां राष्‍ट्रपति ने अपने परिचितों से मुलाकात की। सोमवार, 28 जून को राष्‍ट्रपति कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का दो दिवसीय दौरा करेंगे। तत्पश्चात मंगलवार, 29 जून को लखनऊ से एक विशेष विमान से राष्ट्रपति दिल्‍ली वापस लौटेंगे।

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