डॉ अंबेडकर और उनकी महिमा मंडन के लिए गढ़े गए कुछ मिथक
“In matric examination, Dr. Ambedkar scored only 282 marks out of total of 750 marks. Ref. Biography of Dr. Babasaheb Ambedkar, written by Dr. Dhananjay Keer.”
भीमराव अंबेडकर का छद्म प्रचार किया जा रहा है। हर जगह हर तरफ उनका झूठा महिमा मंडन राजनीतिक लाभ के उद्देश्य से लगभग सभी राजनीतिक दलों द्वारा किया जाता है। यहां तक कि उन्हें “भगवान” का दर्जा दे दिया गया है। हालांकि यह उनके प्रति श्रद्धा की बात है, तथापि यहां कुछ मिथक विचारणीय हैं, जो अंबेडकर से जुड़े हैं!
1. मिथक: अंबेडकर बहुत मेधावी थे।
सच्चाई: अंबेडकर पूरी जिंदगी में हमेशा थर्ड क्लास में पास हुए।
2. मिथक: अंबेडकर बहुत गरीब थे।
सच्चाई: जिस जमाने में लोग फोटो नहीं खिंचा पाते थे, उस जमाने में अंबेडकर की बचपन की बहुत सी फोटो उपलब्ध हैं, वह भी कोट पैंट में।
3. मिथक: अंबेडकर ने शूद्रों को पढ़ने का अधिकार दिया।
सच्चाई: अंबेडकर के पिता खुद उस जमाने में आर्मी में सूबेदार मेजर थे।
4. मिथक: अंबेडकर को पढ़ने नहीं दिया गया।
सच्चाई: उस जमाने में अंबेडकर को वडोदरा, गुजरात के क्षत्रिय राजा सयाजी गायकवाड़ ने स्कॉलरशिप दी और विदेश पढ़ने भेजा तथा महाराष्ट्रीयन ब्राह्मण गुरु ने अपना उपनाम “अंबेडकर” दिया।
5. मिथक: अंबेडकर ने महिलाओं को पढ़ने का अधिकार दिया।
सच्चाई: अंबेडकर के समय ही 20 पढ़ी-लिखी और उच्च शिक्षित महिलाओं ने संविधान लिखने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।
6. मिथक: अंबेडकर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे!
सच्चाई: अंबेडकर ने हमेशा अंग्रेजों का साथ दिया। “भारत छोड़ो आंदोलन” की जमकर खिलाफत की। अंग्रेजों को पत्र लिखकर कहा कि वे अभी लंबे समय तक भारत में शासन करें। उन्होंने जीवन भर हर जगह आजादी की लड़ाई का विरोध किया।
7. मिथक: अंबेडकर बड़े शक्तिशाली थे!
सच्चाई: सन 1946 के चुनाव में पूरे भारत भर में अंबेडकर की पार्टी की जमानत जप्त हुई थी। वह एक भी लोकसभा चुनाव नहीं जीत सके। एक सांसद ने इस्तीफा देकर अपनी सीट पर अंबेडकर को राज्यसभा में भेजा था।
8. मिथक: अंबेडकर ने अकेले आरक्षण दिया!
सच्चाई: आरक्षण संविधान सभा ने दिया, जिसमें कुल 389 लोग शामिल थे। अंबेडकर का उसमें सिर्फ एक वोट था। आरक्षण सब के वोट से दिया गया था, जो कि आज पूरे देश के लिए एक कोढ़ बन गया है और देश में एक नए ब्राह्मण वर्ग के उदय का आधार बन चुका है।
9. मिथक: अंबेडकर बहुत विद्वान थे।
सच्चाई: अंबेडकर संविधान की प्रारूप समिति (ड्राफ्ट कमेटी) के अध्यक्ष थे। स्थाई समीति के अध्यक्ष परम् विद्वान डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी थे। संविधान का प्रारूप (ड्राफ्ट) भी तत्कालीन एक सवर्ण सिविल सर्वेंट आर. एन. राव ने तैयार किया था। अंबेडकर तथा अन्य ने तो श्री राव की अनुपस्थिति में संविधान सभा में पारित प्रस्तावों के अनुरूप उसमें सिर्फ फेरबदल किया था।
10. मिथक: अंबेडकर राष्ट्रवादी थे।
सच्चाई: सन् 1931 के गोलमेज सम्मेलन में मोहनदास करमचंद गांधी से अंबेडकर ने भारत के टुकड़े करने की बात कर कथित दलितों के लिए अलग “दलिस्तान” की मांग की थी। गांधी के साथ हुआ पूना पैक्ट उसी का परिणाम था।
11. मिथक: अंबेडकर ने भारत का संविधान लिखा।
सच्चाई: जो संविधान अंग्रेजों के 1935 के मैग्नाकार्टा से लिया गया हो और विश्व के 12 देशों से उठाया गया है, उसे मौलिक संविधान कैसे कहा जा सकता है? अभी भी “सोसायटी एक्ट, 1860” ही लिखा जाता है।
12. मिथक: आरक्षण को लेकर संविधान सभा के सभी सदस्य सहमत थे।
सच्चाई: इसी आरक्षण को लेकर सरदार पटेल से अंबेडकर की कहासुनी हो गई थी। सरदार पटेल संविधान सभा की बैठक छोड़़कर चले गये थे। बाद में नेहरू के कहने पर सरदार पटेल वापस आए थे। सरदार पटेल ने कहा कि जिस भारत को अखंड भारत बनाने के लिए भारतीय देशी राजाओं, महराजाओं, रियासतदारों, तालुकेदारों ने अपनी 546 रियासतों का भारत में विलय कर दिया, जिसमें 513 रियासतें क्षत्रिय राजाओं की थीं, इस आरक्षण के विष से भारत भविष्य में खंडित होने के कगार पर पहुंच जाएगा।
13. मिथक: अंबेडकर स्वेदशी थे।
सच्चाई: देश के सभी नेताओं का तत्कालीन पहनावा भारतीय पोशाक धोती-कुर्ता, पैजामा-कुर्ता, सदरी, टोपी, पगड़ी, साफा, आदि हुआ करता था। गांधीजी ने विदेशी पहनावों और वस्तुओं की होली जलवाई थी।यद्यपि नेहरू-गांधी सहित अन्य तत्कालीन नेता विदेशी विश्वविद्यालयों और विदेशों में पढ़े-रहे भी थे, फिर भी स्वदेशी आंदोलन से जुड़े रहे। अंबेडकर की कोई भी तस्वीर भारतीय पहनावे में नहीं है। अंबेडकर पूरी तरह से अंग्रेजियत के हिमायती थे।
Savita Bhimrao Ambedkar (née Kabir; 27 January 1909 – 29 May 2003), was an Indian social activist, doctor and the 2nd wife of Babasaheb Ambedkar, the so-called father of the Indian Constitution.
अंत में कहना यह है कि अंग्रेजों ने भारत छोड़कर जाने से पहले ही अपने नापाक इरादों को लागू करने के लिए, जिससे भविष्य में भारत खंडित हो सके, अंग्रेजी शख्सियत के रूप में अंबेडकर की खोज कर ली थी।
हमारा उद्देश्य किसी की भावनाओं को किसी भी तरह से ठेस पहुचाना नहीं है, बल्कि मात्र सच्चाई बताने की कोशिश करना है। तथ्यों की पुष्टि स्वयं भी की जा सकती है।
साभार : सोशल मीडिया !!
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